कोयंबटूर, 2 जुलाई (आईएएनएस)। लंबे समय से बारिश न होने के कारण तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के वडमल्ली किसान अपनी फसल बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। थोंडामुथुर ब्लॉक में फूलों वाले पौधों के बड़े-बड़े हिस्से सूखने लगे हैं।
इस इलाके के किसानों का कहना है कि गर्मियों में अच्छी बारिश न होने और उसके बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून की कम बारिश की वजह से पानी की भारी कमी हो गई है। इससे ओणम के मुनाफे वाले बाजार के लिए लगाई गई फसलों पर बुरा असर पड़ा है।
वडिवेलमपालयम, मुगासिमंगलम, मोलापालयम और कलिमंगलम गांवों में 500 एकड़ से अधिक जमीन पर वडमल्ली (गोम्फ्रेना ग्लोबोसा, जिसे आम तौर पर ग्लोब अमरैंथ कहा जाता है) की खेती की गई है। इस फसल को तैयार होने में लगभग 150 दिन लगते हैं और करीब 120 दिनों के बाद इसमें फूल आने लगते हैं। ओणम के मौसम में केरल में त्योहार की मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जाती है। हालांकि, कई कमर्शियल फसलों की तुलना में इसे कम सिंचाई की जरूरत होती है, लेकिन किसानों का कहना है कि नमी की मौजूदा कमी ने पौधों को खत्म होने की कगार पर पहुंचा दिया है।
वडिवेलमपालयम के किसान आर. कार्तिकेयन ने बताया कि शुरुआत में फसल अच्छी तरह बढ़ रही थी, लेकिन लगातार सूखे मौसम के कारण वह सूखने लगी। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद थी कि अब तक मानसून की कुछ बारिश हो जाएगी, लेकिन खेत एक सप्ताह से सूखे पड़े हैं। पौधे हर दिन कमजोर हो रहे हैं और अगर तुरंत बारिश नहीं हुई, तो उनमें से कई शायद बच न पाएं।”
किसानों के अनुसार, वडमल्ली की खेती की लागत लगभग 30,000 रुपए प्रति एकड़ आती है, जिसमें जमीन तैयार करने, बीज, मजदूरी और दूसरी चीज़ों का खर्च शामिल है। ब्लॉक के कई हिस्सों में सिंचाई की पक्की सुविधा न होने के कारण, किसानों को डर है कि अगर मौसम जल्द ठीक नहीं हुआ, तो वे अपनी लागत भी नहीं निकाल पाएंगे।
इसी इलाके के एक और किसान एस. मणिकंदन ने बताया कि सूखे की वजह से जंगली जानवरों का व्यवहार भी बदल गया है। उन्होंने कहा, “जंगली सूअर आम तौर पर इस फसल से दूर रहते हैं, लेकिन आस-पास के जंगलों में खाने-पीने की चीज़ों की कमी के कारण वे हमारे खेतों में आ गए हैं। वे पहले से ही कमजोर हो चुके पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे हमारा नुकसान और बढ़ रहा है।”
किसानों का कहना है कि कम बारिश की वजह से इस इलाके में उगाई जाने वाली मक्का, अरहर दाल, सेम और कद्दू की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।
उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका के बीच, उत्पादकों का मानना है कि ओणम के मौसम में कोयंबटूर से आने वाले फूलों की आवक में काफी कमी आ सकती है, जिससे बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं।
उन्होंने तमिलनाडु सरकार से फसल के नुकसान का आकलन करने और मुआवजे की घोषणा करने की अपील की है, खासकर उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए जिनकी आजीविका पर लंबे समय से बारिश की कमी का बुरा असर पड़ा है।

