Thursday, July 23, 2026
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केरल: विजयन पर लेख नहीं छपने के विवाद में टीसी राजेश की सफाई, बोले- हर लेख का प्रकाशित होना जरूरी नहीं

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तिरुवनंतपुरम, 22 जुलाई (आईएएनएस)। लेखक और पत्रकार टीसी राजेश सिंधु ने बुधवार को एक लेख को लेकर उठे विवाद पर सफाई दी और कहा कि वह सीपीआई(एम) राज्य सचिवालय सदस्य एम स्वराज की इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि किसी लेख को प्रकाशित करना या न करना पूरी तरह अखबार के संपादकीय बोर्ड का अधिकार है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक अखबार का साप्ताहिक अंश रविवार को प्रकाशित नहीं हुआ। इसके बाद अटकलें लगाई जाने लगीं कि मुथिप्पारा के विजयन पर टीसी राजेश द्वारा लिखा गया लेख इसकी वजह बना।

हालांकि, साप्ताहिक अंश सोमवार को प्रकाशित हुआ, जिसमें वीएस अच्युतानंदन पर एक विशेष लेख छपा, लेकिन राजेश का लेख प्रकाशित नहीं हुआ।

राजेश ने पहले फेसबुक पर लिखा था कि गलती मेरी थी, जिसके बाद इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई। बाद में एम स्वराज ने कहा कि संबंधित लेख उनके सामने आया ही नहीं था।

बुधवार को एक विस्तृत फेसबुक पोस्ट में राजेश ने कहा कि उन्होंने टीवी चैनलों की लगातार प्रतिक्रिया मांगने की कोशिशों का सीधे जवाब न देने का फैसला किया, इसलिए अपनी बात सोशल मीडिया के जरिए रख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया कि अखबार उनके लेख को प्रकाशित करने के लिए बाध्य था।

पत्रकारिता में अपने लंबे अनुभव का जिक्र करते हुए राजेश ने कहा कि लेखों का खारिज होना, रिपोर्टों का संपादन होना और शीर्षकों में बदलाव किया जाना मीडिया संस्थानों में सामान्य संपादकीय प्रक्रिया का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि अपने करियर में विभिन्न अखबारों और पत्रिकाओं में उन्होंने ऐसे कई फैसले देखे हैं, इसलिए उनके लेख का प्रकाशित न होना कोई असामान्य बात नहीं है।

राजेश ने बताया कि साप्ताहिक अंश की संपादकीय टीम ने उन्हें और लेख लिखने के लिए प्रोत्साहित किया था। इसके बाद उन्होंने मुथिप्पारा जाकर विजयन से बातचीत की और लेख तैयार किया। उन्होंने लेख और तस्वीरें ईमेल के माध्यम से प्रकाशन के लिए भेज दी थीं।

राजेश ने बताया कि रविवार को एक पत्रकार मित्र ने उन्हें बताया कि उनका लेख होने की वजह से साप्ताहिक परिशिष्ट रोक दिया गया है। इसी जानकारी को सही मानते हुए उन्होंने फेसबुक पर लिखा था कि गलती मेरी थी, हालांकि उन्होंने लेख की सामग्री का खुलासा नहीं किया था।

उन्होंने कहा कि जब बाद में एम स्वराज ने कहा कि ऐसा कोई लेख उनके पास नहीं आया था तो उन्हें इसमें कोई आश्चर्य नहीं हुआ, क्योंकि हर लेख का रेजिडेंट एडिटर तक पहुंचना जरूरी नहीं होता।

बुधवार को ही की गई दूसरी फेसबुक पोस्ट में राजेश ने मीडिया के एक वर्ग पर आरोप लगाया कि उसने उनकी पहले की टिप्पणी का केवल एक हिस्सा प्रकाशित किया और उस हिस्से को नजरअंदाज कर दिया, जिसमें उन्होंने एम स्वराज के रुख का समर्थन किया था।

उन्होंने कहा कि इस तरह की रिपोर्टिंग से उनकी बात का अधूरा और भ्रामक चित्र पेश किया गया।

राजेश ने लिखा, “अगर मकसद मुझे नुकसान पहुंचाना था तो इसके लिए और भी कई तरीके हो सकते थे।”