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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फिलीपींस दौरे पर, रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए करेंगे कई द्विपक्षीय बैठकें

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सेबू (फिलीपींस), 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को तीन दिवसीय दौरे पर फिलीपींस के सेबू पहुंचे। इस दौरान वह 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) में हिस्सा लेंगे और बैठक के इतर कई द्विपक्षीय मुलाकात भी करेंगे। यह जानकारी रक्षा मंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट के जरिये दी।

राजनाथ सिंह मंगलवार को नई दिल्ली से रवाना हुए थे। वह 28 और 29 अक्टूबर को होने वाली दो दिवसीय बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भारत का पक्ष रखेंगे।

अपने दौरे के बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अपनी ‘एक्ट ईस्ट नीति’ के तहत क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने, आसियान की केंद्रीय भूमिका को बढ़ावा देने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, “दौरे पर मैं सहभागी देशों के अपने समकक्षों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें भी करूंगा। ये बैठकें मौजूदा रक्षा संबंधों की समीक्षा करने और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के नए अवसर तलाशने का महत्वपूर्ण मंच साबित होंगी।”

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, एडीएमएम आसियान का सर्वोच्च रक्षा परामर्श एवं सहयोग तंत्र है। एडीएमएम-प्लस में आसियान के सदस्य देशों ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते और वियतनाम के अलावा भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे संवाद साझेदार देश भी शामिल होते हैं।

भारत 1992 में आसियान का संवाद साझेदार बना था, जबकि पहली एडीएमएम-प्लस बैठक 12 अक्टूबर 2010 को वियतनाम के हनोई में आयोजित हुई थी। 2017 से इस मंच के रक्षा मंत्री हर वर्ष बैठक कर क्षेत्रीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करते हैं।

वर्ष 2026 में एडीएमएम-प्लस की अध्यक्षता फिलीपींस कर रहा है। भारत 2024-2027 चक्र के लिए मलेशिया के साथ आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह (एक्सपर्ट्स वर्किंग ग्रुप ऑन काउंटर-टेररिज्म) का सह-अध्यक्ष भी है।

भारत की यह भागीदारी दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ रक्षा और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने तथा एक्ट ईस्ट नीति के तहत क्षेत्रीय सहयोग को और गहरा करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।