पटना, 27 जून (आईएएनएस)। लंबे समय के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के पूर्व नेता आरसीपी सिंह ने पटना में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की।
दोनों नेताओं के बीच लंबे समय तक रही राजनीतिक दूरी के बाद हुई इस बातचीत ने आरसीपी सिंह के भविष्य के राजनीतिक रास्ते को लेकर अटकलों को फिर से हवा दे दी है।
आरसीपी सिंह ने शनिवार को सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार के साथ एक तस्वीर पोस्ट करके बैठक की जानकारी साझा की।
आरसीपी सिंह ने पोस्ट में इस मुलाकात को सौहार्दपूर्ण बताया और कहा कि वे अपने पूर्व नेता से मिले और उनसे बातचीत की।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, आरसीपी सिंह अपने समर्थकों के साथ नीतीश कुमार के आवास के बाहर इंतजार करते रहे।
जब नीतीश कुमार बाहर आए तो आरसीपी सिंह ने सम्मानपूर्वक उनका अभिवादन किया।
इस मौके की तस्वीरों में दोनों नेता एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
कुछ खबरों के मुताबिक, नीतीश कुमार ने पार्टी के दूसरे कार्यकर्ताओं और नेताओं से बातचीत करने से पहले कुछ देर के लिए उन्हें भी देखा या उनसे बात की।
आरसीपी सिंह का कहना है कि उन्होंने नीतीश कुमार से मुलाकात और बातचीत की थी और इस बातचीत को सौहार्दपूर्ण बताया।
इस बैठक ने जनता दल (यूनाइटेड) में आरसीपी सिंह की संभावित वापसी को लेकर नई राजनीतिक अटकलों को जन्म दिया है।
हालांकि, न तो आरसीपी सिंह और न ही जेडी(यू) नेतृत्व ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा की है।
राजनीतिक हलकों में ऐसी चर्चा है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने इस मुलाकात को कराने में भूमिका निभाई है, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आरसीपी सिंह को कभी नीतीश कुमार के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक माना जाता था।
आईएएस अधिकारी के तौर पर काम करने के बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और जेडीयू के जरिए सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
नीतीश कुमार ने उन्हें कई अहम जिम्मेदारियां सौंपीं, जिनमें जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दो बार राज्यसभा सदस्य के तौर पर उनकी भूमिका शामिल है।
बाद में वे केंद्र सरकार में केंद्रीय मंत्री बने।
केंद्रीय मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान दोनों नेताओं के बीच रिश्ते बिगड़ गए, जिसके चलते आखिरकार उन्हें जेडीयू छोड़ना पड़ा।
पार्टी छोड़ने के बाद आरसीपी सिंह भाजपा में शामिल हो गए, लेकिन वहां कोई बड़ी राजनीतिक भूमिका नहीं बना पाए।
बाद में वे प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाले जन सुराज अभियान से जुड़ गए।
उनकी बेटी ने भी हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वह सफल नहीं हो पाईं।

