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साहित्य विचारों की आजादी का मंच, पढ़ना अहिंसक प्रतिरोध: अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल

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सिएटल, 19 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने पढ़ने की अहमियत समझाई है। उन्होंने लोगों से सेंसरशिप का विरोध करने और चुनौती दी गई किताबों को पढ़ना जारी रखने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि साहित्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने और दबाई जा रही आवाजों को सामने लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

सिएटल में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे संस्करण के उद्घाटन समारोह में जयपाल ने कहा, “मेरे लिए पढ़ना अहिंसक प्रतिरोध का सबसे बड़ा माध्यम है।”

सिएटल पब्लिक लाइब्रेरी में आयोजित कार्यक्रम में जयपाल ने किताबों के इस उत्सव को अमेरिका और दुनिया के दूसरे हिस्सों में अभिव्यक्ति, असहमति और लोकतांत्रिक बहस पर बढ़ती पाबंदियों के संदर्भ से जोड़ा। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के बीच विचारों का आदान-प्रदान लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है।

जयपाल ने अमेरिकी राष्ट्रपति के सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित करने की भी आलोचना की।

उन्होंने अमेरिका में कुछ किताबों पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी जिक्र किया। इनमें टोनी मॉरिसन की ‘द ब्लूएस्ट आई’, ‘द काइट रनर’, ‘मिल्क एंड हनी’ और अरुंधति रॉय की ‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ शामिल हैं।

जयपाल ने कहा कि इस तरह के कदम बुनियादी स्वतंत्रताओं के लिए खतरा हैं और उन्होंने इनका विरोध जारी रखने का संकल्प जताया।

उन्होंने कहा, “हम अपने लोकतंत्र को फिर से मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे कि हमारे मौलिक अधिकारों को बंद न किया जा सके।”

जयपाल ने लोगों से केवल मतदान और सामुदायिक स्तर पर सक्रिय रहने तक सीमित न रहने, बल्कि लगातार पढ़ने, अपने अनुभव साझा करने और उन लेखकों की कहानियों से जुड़ने की भी अपील की, जिनकी आवाज दबाई जा रही है।

साहित्य की भूमिका बताते हुए उन्होंने कहा कि यह शक्तिशाली संस्थानों से सवाल करता है और हमारी बातचीत तथा सोच की सीमाओं को विस्तार देता है।

उन्होंने कहा, “यह किसी को हमारी कल्पना पर लगाम लगाने की अनुमति नहीं देता, ताकि हम अपने अनुभव और अपनी आगे की यात्रा एक-दूसरे के साथ साझा कर सकें।”

जयपाल ने कहा कि साहित्य महोत्सव एशियाई मूल के अमेरिकियों के प्रति बढ़ती शत्रुता, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्षों और नागरिक स्वतंत्रताओं पर लग रही पाबंदियों के बीच विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।

उन्होंने कहा, “यह विचारों के आदान-प्रदान और असंभव को संभव बनाने के सपने देखने का हमारा घर है।”

जयपाल ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के भारत से निकलकर अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, मालदीव और ऑस्ट्रेलिया तक पहुंचने का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस मंच ने भारतीय और दक्षिण एशियाई लेखकों, फिल्मकारों और कलाकारों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में नए दर्शकों तक पहुंचने का अवसर दिया है।

इस मौके पर जयपाल ने भारत और लेखन से अपने व्यक्तिगत रिश्ते को भी याद किया। उन्होंने बताया कि वह महज 16 वर्ष की उम्र में अकेली अमेरिका पहुंची थीं। उनके माता-पिता का मानना था कि अमेरिका उन्हें आगे बढ़ने और खुद की पहचान के साथ स्वतंत्र जीवन जीने के अवसर देगा। अमेरिकी नागरिक बनने में उन्हें 17 वर्ष लगे।

अमेरिका पहुंचने के कई वर्ष बाद जयपाल भारत लौटीं और करीब दो वर्ष गांवों में रहीं। इस दौरान उन्होंने अपने जन्मस्थान और अपनी पहचान के साथ रिश्ते को नए सिरे से समझने की कोशिश की।

भारत में बिताए उस समय ने उनकी पहली किताब ‘पिलग्रिमेज टू इंडिया: अ वुमन रिविजिट्स हर होमलैंड’ को आकार दिया। यह किताब सिएटल के सील प्रेस से प्रकाशित हुई और बाद में पेंगुइन इंडिया ने भी इसे प्रकाशित किया।

जयपाल ने अपनी दूसरी किताब ‘यूज द पावर यू हैव: अ ब्राउन वुमन्स गाइड टू पॉलिटिक्स एंड पॉलिटिकल चेंज’ का भी जिक्र किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह किताब दूसरी महिलाओं को अपने प्रभाव और अपनी ताकत को पहचानने तथा उसका इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करेगी।

उन्होंने महोत्सव के आयोजकों, पाठकों और सिएटल पब्लिक लाइब्रेरी का आभार जताया। जयपाल ने सिएटल की स्वतंत्र किताबों की दुकानों, छोटे प्रकाशकों और लेखकों के समुदाय की भी सराहना की और उन्हें शहर के साहित्यिक जीवन का अहम हिस्सा बताया।

जयपाल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं। सिएटल के इस साहित्यिक आयोजन में उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन के साथ-साथ भारत से अमेरिका तक की अपनी यात्रा, प्रवास और लेखन के अनुभवों को भी साझा किया।