कोलकाता, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में दुष्कर्म और हत्या की शिकार हुई जूनियर डॉक्टर के पिता की ओर से शनिवार को पश्चिम बंगाल में एक नया आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
उनकी यह चेतावनी सुप्रीम कोर्ट से अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को वित्तीय अनियमितताओं के एक मामले में जमानत देने के फैसले के बाद आई है।
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ (डिवीजन बेंच) ने संदीप घोष को जमानत दे दी। इसके लिए कोर्ट ने उनके लंबे समय तक जेल में रहने और मुकदमे की धीमी गति का हवाला दिया।
जूनियर डॉक्टर के पिता शेखर देबनाथ ने पत्रकारों से कहा, “मैं इसे अंत तक देखूंगा। अगर जरूरत पड़ी, तो मैं इस मुद्दे पर राज्य में एक नया आंदोलन शुरू करूंगा और सड़कों पर उतरूंगा।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या एक नया आंदोलन मौजूदा भाजपा-नीत राज्य सरकार के खिलाफ विरोध माना जाएगा, खासकर तब, जब उनकी पत्नी और पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ सत्ताधारी पार्टी की विधायक हैं तो उन्होंने कहा कि राजनीतिक हालात उन्हें बेटी के लिए न्याय मांगने से नहीं रोक सकते।
पीड़िता के पिता ने कहा, “इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह सत्ताधारी दल का हिस्सा हैं। मैं न्याय के लिए जो भी जरूरी होगा, वह करूंगा।”
अगस्त 2024 में जूनियर डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के बाद, आरजी. कर अस्पताल में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की खबरें सामने आई थीं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान संदीप घोष आरजी कर के प्रिंसिपल थे।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने राज्य द्वारा संचालित इस मेडिकल संस्थान में कथित भ्रष्टाचार के आरोप में संदीप घोष को गिरफ्तार किया था। इसके बाद पीड़िता के माता-पिता ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की मौत में प्रभावशाली लोग शामिल थे।
कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद, संदीप घोष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। शुक्रवार को राहत देते हुए, सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने मुकदमे की धीमी प्रगति पर गौर किया।
पीठ ने पाया कि हालांकि संदीप घोष दो साल से अधिक समय से हिरासत में हैं, लेकिन इस मामले में बताए गए 147 गवाहों में से केवल कुछ ही लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं।
लंबे समय तक जेल में रहने और कानूनी कार्यवाही की धीमी गति को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने संदीप घोष को जमानत दे दी। इस फैसले के बाद, पीड़िता के पिता ने पश्चिम बंगाल में एक और विरोध प्रदर्शन शुरू होने का संकेत दिया है।
