Thursday, July 30, 2026
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बलूचिस्तान में पाकिस्तानी बलों के बढ़ते अत्याचार, एचआरसीबी ने उजागर किए हत्या और गुमशुदगी के आंकड़े

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क्वेटा, 29 जुलाई (आईएएनएस)। बालूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ओर से क‍िए जा रहे अत्‍याचारों पर मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले एक प्रमुख संगठन ने च‍िंता जताई। संगठन ने जून महीने के दौरान 77 लोगों की हत्या और 63 लोगों के जबरन गायब किए जाने के मामलों को उजागर क‍िया।

ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (एचआरसीबी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जून में पूरे बलूचिस्तान में कुल 77 लोगों की मौत दर्ज की गई। इनमें 76 पुरुष और एक महिला शामिल थे। वहीं, 42 पीड़ितों की पहचान की पुष्टि नहीं हो सकी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मारे गए लोगों में से 19 ऐसे थे जिन्हें पहले जबरन गायब किया गया था। इनमें चार लोगों का जून में ही अपहरण किया गया और उसी महीने उनकी हत्या कर दी गई, जबकि बाकी 15 लोगों को पिछले महीनों में जबरन गायब किया गया था।

एचआरसीबी ने कहा, “कथित मुठभेड़ें सबसे अधिक दर्ज की गई हत्याओं का तरीका रहीं। ऐसे 39 मामले सामने आए, जो कुल घटनाओं के आधे से भी ज्यादा हैं। इसके अलावा 12 टारगेट किलिंग, 10 फर्जी मुठभेड़, नौ हिरासत में मौत, तीन मामलों में शव बरामद होने की घटनाएं दर्ज की गईं। वहीं, ऑनर किलिंग और अंधाधुंध गोलीबारी से दो-दो लोगों की मौत हुई।”

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा मामलों में पाकिस्तान की फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) का नाम सामने आया, जो 53 घटनाओं से जुड़ी बताई गई। इसके बाद 14 मामलों में अज्ञात लोगों की भूमिका बताई गई। वहीं, राज्य समर्थित डेथ स्क्वॉड और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) का नाम पांच-पांच मामलों में सामने आया।

जबरन गायब किए गए 63 लोगों में दो महिलाएं और तीन किशोर शामिल थे। एचआरसीबी के मुताबिक, इनमें से केवल 17 लोगों को जून के दौरान रिहा किया गया, जबकि बाकी अब भी बिना किसी संपर्क के हिरासत में रखे गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि जबरन गायब करने के मामलों में FC सबसे बड़ी जिम्मेदार एजेंसी रही, जिसका नाम 36 मामलों में सामने आया। इसके बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां 16 मामलों, राज्य समर्थित डेथ स्क्वॉड 6 मामलों और CTD 5 मामलों से जुड़ा पाया गया।

एचआरसीबी के अनुसार, लोगों को जबरन गायब करने के लिए सबसे ज्यादा घरों पर छापेमारी का तरीका अपनाया गया। ऐसे 27 मामले दर्ज किए गए, जो कुल मामलों का 42.86 प्रतिशत हैं। इसके अलावा 20 मामलों (31.75 प्रतिशत) में लोगों को हिरासत में लेने के बाद गायब किया गया। 10 लोग (15.87 प्रतिशत) सैन्य अभियानों के दौरान गायब हुए। वहीं, तीन लोगों को एफसी कैंप में बुलाने के बाद गायब किया गया और तीन अन्य लोगों को सुरक्षा चौकियों से हिरासत में लेकर लापता कर दिया गया।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि इसी अवधि के दौरान पाकिस्तानी बलों ने बलोचिस्तान में कई सैन्य अभियान चलाए, जिनके कारण आम लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा, आवाजाही पर लंबे समय तक पाबंदियां लगीं और नागरिकों तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की घटनाएं हुईं।

रिपोर्ट में आगे कहा गया, “केच इलाके में बार-बार रात के समय छापेमारी की गई, जहां महिलाओं और बच्चों के साथ बदसलूकी और डराने-धमकाने की घटनाएं हुईं। कई जगहों पर सामान भी लूटा गया। मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलोच के घर पर भी लंबे समय तक छापेमारी की गई।”