Tuesday, May 26, 2026
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समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में साथ मिलकर करेंगे काम : मार्को रूबियो

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नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मंगलवार को क्वाड की आर्थिक और रणनीतिक अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि इसमें शामिल देश ‘मजबूत लोकतंत्र’ हैं, जो मिलकर दुनिया की लगभग एक-तिहाई जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं और समान मूल्यों को साझा करते हैं।

भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों के साथ संयुक्त प्रेस बयान में बोलते हुए रूबियो ने समुद्री सुरक्षा, बंदरगाह ढांचे और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी कई नई क्वाड पहलों की घोषणा की।

उन्होंने कहा, “मंत्री जयशंकर, वोंग और मोटेगी, इस बेहद उपयोगी चर्चा और हमारी टीमों की मेहनत के लिए धन्यवाद। हम इस साझेदारी को सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि इसे काम करने वाली साझेदारी बनाना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा क‍ि आज इस मंच पर मौजूद देश मिलकर दुनिया की लगभग एक-तिहाई जीडीपी और करीब दो अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये सिर्फ आर्थिक रूप से ताकतवर देश नहीं हैं, बल्कि ऐसे देश हैं, जो मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं। आर्थिक विकास और कई अन्य मुद्दों पर भी हमारी सोच काफी हद तक एक जैसी है।

रूबियो ने कहा कि 16 महीने पहले जब उन्होंने विदेश मंत्री का पद संभाला था, तब सभी देशों ने मिलकर तय किया था कि क्वाड सिर्फ दुनिया की समस्याओं पर चर्चा करने का मंच नहीं रहेगा। हम चाहते थे कि यह सिर्फ बैठकों तक सीमित न रहे, बल्कि एक ऐसा समूह बने, जो जमीन पर काम करे। मुझे खुशी है कि हमारी टीमों की मेहनत से आज हम कुछ ठोस और वास्तविक उपलब्धियों की घोषणा कर पा रहे हैं।

रूबियो ने इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोऑपरेशन पहल और इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस पहल के विस्तार की घोषणा की। उन्होंने अगला ‘क्वाड एट सी’ मिशन आयोजित करने के लिए भारत का धन्यवाद भी किया।

उन्होंने कहा, “समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर दो बड़े ऐलान किए जा रहे हैं। पहला है इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोऑपरेशन पहल, जिसके तहत हमारे देश अपनी समुद्री निगरानी क्षमताओं का इस्तेमाल करके जानकारी साझा करेंगे। इसके अलावा इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस पहल का भी विस्तार किया जाएगा, जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों को लगभग रियल-टाइम समुद्री जानकारी मिल सकेगी।”

उन्होंने कहा, “मैं भारत का धन्यवाद करना चाहता हूं कि वह अगले ‘क्वाड एट सी’ मिशन की मेजबानी करेगा। इसमें हमारे देशों के कोस्ट गार्ड एक साथ मिलकर काम करेंगे। समुद्री सुरक्षा इसलिए भी बहुत जरूरी है क्योंकि दुनिया का लगभग 60 प्रतिशत समुद्री व्यापार इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से होकर गुजरता है। यह सिर्फ हमारे चार देशों ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों के लिए बेहद अहम है।”

रूबियो ने बताया कि क्वाड देश पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि क्वाड देश फिजी के साथ मिलकर वहां के बंदरगाह ढांचे को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने की योजना बना रहे हैं।

क्रिटिकल मिनरल्स के मुद्दे पर उन्होंने कहा क‍ि हम क्वाड क्र‍िट‍िकल म‍िनरल फ्रेमवर्क की घोषणा करेंगे। इसका मकसद आर्थिक नीतियों और निवेश के जरिए महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत करना है। इसमें खनन, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्र शामिल होंगे।

रूबियो ने इंडो-पैसिफिक ऊर्जा सुरक्षा पहल की भी घोषणा की, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि अमेरिका इस साल के अंत में क्वाड देशों के लिए एक ‘फ्यूल सिक्योरिटी फोरम’ आयोजित करेगा।

ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा पर उन्होंने कहा, “इस पहल के तहत हम तकनीक, नीति प्रबंधन, अंतरराष्ट्रीय बाजार विश्लेषण और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे क्षेत्रों में सहयोग के मौके तलाशेंगे। इस पर एक अलग संयुक्त बयान भी जारी किया जाएगा।”

रूबियो ने विश्वास जताया कि हम इस साझेदारी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यह अमेरिका की वैश्विक रणनीति का एक अहम हिस्सा है। हमें खुशी है कि आज हम इन पहलों की घोषणा कर रहे हैं, और आगे भी मिलकर नए अवसरों पर काम करने को लेकर उत्साहित हैं।