कांगो में तेजी से फैल रहा इबोला वायरस, रवांडा-डीआरसी बॉर्डर बंद

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किगाली, 17 मई (आईएएनएस)। कांगो में इबोला के बढ़ते प्रकोप के चलते जरूरी कदम उठाए गए हैं। रवांडा और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) के बीच की सीमा को रविवार को रवांडा के रुबावु जिले में बंद कर दिया गया।

रवांडा के पश्चिमी प्रांत के रुबावु जिले के मेयर प्रॉस्पर मुलिंडवा ने मीडिया को बताया कि गोमा और रुबावु-गिसेनी को जोड़ने वाली सीमा को अनिश्चित समय के लिए बंद किया गया है, ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके।

स‍िन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा, “गोमा और गिसेनी को जोड़ने वाली सीमाएं इबोला के प्रकोप के कारण अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं। हम अपने लोगों से बात करते रहेंगे और उन्हें समझाएंगे कि यह फैसला क्यों लिया गया है।”

मुलिंडवा ने लोगों से धैर्य रखने और सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह कदम जनता की सेहत और समुदायों को संभावित संक्रमण से बचाने के लिए उठाया गया है।

हालांकि, सीमा अस्थायी रूप से बंद है, फिर भी स्वास्थ्य अधिकारी उन रवांडा नागरिकों की जांच कर रहे हैं, जो कांगो से आ रहे हैं, और कांगो के नागरिकों को भी सख्त स्वास्थ्य जांच के बाद अपने देश लौटने की अनुमति दी जा रही है।

अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, कांगो में इस इबोला प्रकोप से अब तक 87 लोगों की मौत हो चुकी है। संस्था ने चेतावनी दी है कि यह प्रकोप ‘बुंडीबुग्यो’ स्ट्रेन से जुड़ा है, जिसके लिए अभी कोई विशेष वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, और यह तेजी से फैलने का खतरा पैदा कर सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) ने रविवार को कहा कि कांगो और युगांडा में चल रहा यह इबोला प्रकोप ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति’ बन गया है।

डब्‍ल्‍यूएचओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर कहा कि यह प्रकोप बुंडीबुग्यो वायरस के कारण हुआ है, लेकिन यह महामारी की श्रेणी में नहीं आता।

डब्‍ल्‍यूएचओ के महानिदेशक ने कांगो और युगांडा के नेतृत्व का धन्यवाद किया और कहा कि उन्होंने इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी और सख्त कदम उठाने की प्रतिबद्धता दिखाई है।

उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि अन्य देशों को समय रहते तैयारी करने का मौका देने के लिए जोखिम के बारे में पारदर्शिता दिखाई है, ताकि वैश्विक समुदाय सही कदम उठा सके।