Thursday, July 16, 2026
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‘ईरानी व्यवस्था’ से चलेगा होर्मुज, दुश्मन नहीं थोप सकता हम पर अपनी इच्छा: गालिबाफ

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तेहरान, 16 जुलाई (आईएएनएस)। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा का सीधा संबंध होर्मुज स्ट्रेट प्रशासन में “ईरानी व्यवस्था” को कायम रखने से है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तेहरान किसी भी “दुश्मन” को अपनी इच्छा ईरान पर थोपने की अनुमति नहीं देगा।

बुधवार (स्थानीय समय) को जारी एक बयान में गालिबाफ, जो ईरान की वार्ता टीम के प्रमुख भी हैं, ने कहा कि अमेरिका जब भी मौका मिलता है, अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए ईरान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा कि युद्ध हो या वार्ता, ईरान को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय हितों, यथार्थवादी सोच और दीर्घकालिक रणनीति के आधार पर ही अपने कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध का स्वागत नहीं करता, “लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हमें हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए।”

गालिबाफ ने कहा कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीति और वार्ता को समानांतर रूप से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

हाल ही में अमेरिका के साथ हुए शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) का उल्लेख करते हुए (जिसमें अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की वार्ता अवधि निर्धारित की गई थी) संसद अध्यक्ष ने कहा कि यह एमओयू तभी सार्थक है जब इसकी शर्तों का सम्मान और पालन किया जाए। अन्यथा, यदि ईरान को इस समझौते से कोई लाभ नहीं मिलता है, तो उसके लिए इस पर कायम रहने का कोई कारण नहीं है।

18 जून को एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे जिसका उद्देश्य लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में सभी मोर्चों पर जारी संघर्ष को समाप्त करना था। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में ईरानी और अमेरिकी बलों के बीच हुई झड़पों के बाद यह समझौता अब अनिश्चितता के दौर में पहुंच गया है।

इस बीच, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ एक और दौर के हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने गुरुवार तड़के (भारतीय समयानुसार) इसकी जानकारी दी।

सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में कहा, “दोपहर 3 बजे ईटी (1900 जीएमटी) अमेरिकी बलों ने आज ईरान के खिलाफ दूसरे चरण के हमले शुरू किए। इन हमलों का लक्ष्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में किया जाता है।”