पुडुकोट्टई, 7 जून (आईएएनएस)। डीएमके के वरिष्ठ नेता आर.एस. भारती ने रविवार को कांग्रेस के साथ भविष्य में किसी भी तरह के राजनीतिक मेल-मिलाप की संभावना से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों के रास्ते पूरी तरह से अलग हो गए हैं और उनकी पार्टी के कैडर इसे कभी भी गठबंधन में वापस स्वीकार नहीं करेंगे।
पुडुकोट्टई में मीडिया से बात करते हुए भारती ने कहा कि दोनों पार्टियों के बीच अब कोई पॉलिटिकल रिश्ता नहीं है और भविष्य में फिर से साथ आने की अटकलों को खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा कि अलग होना फाइनल हो गया है और कहा कि डीएमके के जमीनी स्तर के वर्कर्स, लीडरशिप लेवल पर लिए गए फैसलों के बावजूद, रिश्ते फिर से बनाने की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध करेंगे।
भारती की यह बात डीएमके के परफॉर्मेंस और अलायंस पॉलिटिक्स को लेकर कांग्रेस नेताओं की हालिया आलोचना के जवाब में आई है।
कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर पर निशाना साधते हुए, भारती ने सुझाव दिया कि कांग्रेस नेताओं को दूसरी पार्टियों पर कमेंट करने से पहले अपनी चुनावी स्थिति की जांच करनी चाहिए।
डीएमके के पुराने नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य ने आने वाले लोकल बॉडी इलेक्शन पर भी ध्यान दिया और अपनी पार्टी की ऑर्गेनाइजेशनल ताकत पर भरोसा जताया।
भाजपा नेताओं समेत पॉलिटिकल विरोधियों को चुनौती देते हुए, भारती ने जनवरी की शुरुआत में ही चुनाव कराने की मांग की और विरोधियों को जमीनी स्तर पर अपनी पॉपुलैरिटी साबित करने की चुनौती दी।
उन्होंने कहा कि लोकल बॉडी इलेक्शन में वोटर कैंडिडेट को उनकी पर्सनल काबिलियत और पब्लिक सर्विस के आधार पर चुनते हैं। अगर हमारे विरोधियों को अपनी ताकत पर भरोसा है तो उन्हें मेयर का एक भी पद जीतने दें।
डीएमके की सोच को दोहराते हुए भारती ने भाजपा के साथ भविष्य में किसी भी तरह के अलायंस से इनकार किया और कहा कि पार्टी अपने द्रविड़ सिद्धांतों पर कायम है।
उन्होंने पॉलिटिकल दलबदल के बढ़ते ट्रेंड की भी आलोचना की और कहा कि तमिलनाडु में आया राम गया राम कल्चर बन रहा है। जिसका मतलब है कि नेता अपने फायदे के लिए बार-बार पार्टियां बदलते हैं।
भारती के मुताबिक, जो नेता पद और पावर की चाहत में पाला बदलते हैं, उन्हें शायद ही कभी लंबे समय तक पॉलिटिकल सफलता मिलती है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि हाल ही में दलबदल करने वाले कई लोग पॉलिटिकल हालात बदलने पर आखिरकार अपने असली पॉलिटिकल घरों में लौट आएंगे।
भारती ने एक्टर से पॉलिटिशियन बने विजय की तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) की हालिया चुनावी सफलता को भी कम करके आंकने की कोशिश की। पार्टी की जीत को सोच का सपोर्ट होने के बजाय एक टेम्पररी बात बताते हुए, उन्होंने कहा कि ज्यादातर वोटरों ने टीवीके को सपोर्ट नहीं किया था।
उन्होंने पार्टी की बढ़त का श्रेय ज्यादातर पर्सनैलिटी पर आधारित पॉलिटिक्स और सोशल मीडिया के असर को दिया, साथ ही यह भी अनुमान लगाया कि इसकी पॉपुलैरिटी को आखिरकार गवर्नेंस और जनता की उम्मीदों का टेस्ट झेलना पड़ेगा।

