SGSU Advertisement
Home राष्ट्रीय मध्य प्रदेश: शैल्बी हॉस्पिटल का लाइसेंस सस्पेंड, नए सेफ्टी ऑडिट का इंतजार

मध्य प्रदेश: शैल्बी हॉस्पिटल का लाइसेंस सस्पेंड, नए सेफ्टी ऑडिट का इंतजार

0
3

जबलपुर, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को जबलपुर के शैल्बी अस्पताल में आग लगने की घटना के बाद उसका लाइसेंस सस्पेंड कर दिया। प्रशासन आगे की कार्रवाई पर फैसला लेने से पहले बिजली और फायर-सेफ्टी ऑडिट की नई रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

चीफ मेडिकल ऑफिसर नवीन कोठारी ने आईएएनएस को बताया कि 11 अक्टूबर की घटना के बाद एक जांच टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया और उसके बाद उसका लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया।

कोठारी ने कहा कि शैल्बी अस्पताल में आग लगने की घटना के बाद एक जांच टीम ने निरीक्षण किया, जिसके बाद उसका लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया। अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करने के लिए अब हेल्थ डिपार्टमेंट, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के बिल्डिंग डिपार्टमेंट और फायर डिपार्टमेंट की रिपोर्ट का इंतजार है।

उन्होंने कहा कि अब हमें उम्मीद है कि हेल्थ डिपार्टमेंट, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का बिल्डिंग डिपार्टमेंट और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का फायर डिपार्टमेंट हमें इलेक्ट्रिकल ऑडिट की अपडेटेड रिपोर्ट देंगे।

अधिकारियों की जांच के बाद यह कार्रवाई की गई, जिसमें कथित तौर पर अस्पताल की आग से सुरक्षा की व्यवस्थाओं में कमियां पाई गईं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन कमियों में काम न करने वाला फायर-अलार्म सिस्टम, आग से बाहर निकलने के रास्ते (फायर एग्जिट) के पास रुकावटें और इलेक्ट्रिकल पैनल में गड़बड़ियां शामिल थीं।

11 अक्टूबर को अस्पताल के सेमी-प्राइवेट वार्ड के एक कमरे में आग लग गई, जिसके बाद मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। इस घटना ने अस्पताल की आग से सुरक्षा प्रणालियों के कामकाज और तय सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं।

जांच के नतीजों के आधार पर स्वास्थ्य अधिकारियों ने अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया और संबंधित विभागों से नई रिपोर्ट मांगी। इलेक्ट्रिकल ऑडिट और आग से सुरक्षा के आकलन से यह पता चलने की उम्मीद है कि अस्पताल जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा करता है या नहीं।

सस्पेंशन के समय, अस्पताल को नए मरीजों को भर्ती न करने का निर्देश दिया गया है, साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि जो मरीज पहले से इलाज करवा रहे हैं, उन्हें सही देखभाल मिले। उनकी मेडिकल स्थिति के आधार पर, उन्हें सुरक्षित रूप से डिस्चार्ज या ट्रांसफर करने की व्यवस्था भी करनी होगी।

कोठारी ने कहा कि आगे की कार्रवाई संबंधित विभागों की रिपोर्ट और अस्पताल द्वारा तय सुरक्षा नियमों के पालन पर निर्भर करेगी।