नई दिल्ली, 17 मई (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरने के बाद 20,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया एक जहाज गुजरात तट पर स्थित दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण पर पहुंचा।
अधिकारियों ने बताया कि मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाला एमवी एसवाईएमआई कतर से रवाना हुआ और 13 मई को होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने के बाद शनिवार रात करीब 11:30 बजे कांडला बंदरगाह पर पहुंचा।
मार्च की शुरुआत से, 12 एलपीजी टैंकरों और एक कच्चे तेल के टैंकर सहित 13 भारतीय ध्वज वाले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर चुके हैं। यह ओमान के तट के पास स्थित एक संकरा जलमार्ग है, जिससे सामान्य दिनों में दुनिया के एक-पांचवें तेल और गैस निर्यात का पारगमन होता है।
हालांकि, 28 फरवरी को शुरू हुए पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण इस संकरे जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए, जिसके परिणामस्वरूप ईरान ने जवाबी हमले किए। इस संघर्ष के कारण हाल के दशकों में दुनिया के सबसे भीषण ऊर्जा संकटों में से एक उत्पन्न हो गया है।
भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा की है और वैश्विक ऊर्जा और आपूर्ति प्रवाह की सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद की विशेष बैठक में इन्हें ‘अस्वीकार्य’ बताया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि नागरिक चालक दल को निशाना बनाना और नौवहन की स्वतंत्रता को बाधित करना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
हरीश की ये टिप्पणियां 13 मई को ओमान के तट पर भारतीय ध्वज वाले एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले के कुछ दिनों बाद आई हैं। सोमालिया से आ रहे इस जहाज के सभी 14 चालक दल के सदस्यों को ओमान के अधिकारियों ने बचा लिया, लेकिन हमले को अंजाम देने वाले का नाम तुरंत पता नहीं चल पाया।
यह हमला पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच हुआ, जिससे होकर दुनिया की लगभग एक-पांचवीं ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। इस साल की शुरुआत में क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने के बाद से कम से कम दो अन्य भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर भी हमले हो चुके हैं।

