नई दिल्ली, 2 नवंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य सिद्दारमैया ने सोमवार को नई दिल्ली में एआईसीसी महासचिव केसी. वेणुगोपाल से मुलाकात की। उनसे जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर चल रहे विवाद के बीच वह लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं।
उम्मीद जताई जा रही है कि सिद्दारमैया पार्टी नेतृत्व को इस मामले के ताजा घटनाक्रम के बारे में जानकारी देंगे और इस संभावना पर चर्चा करेंगे कि क्या पार्टी के ही कुछ लोग इस स्टिंग ऑपरेशन में शामिल हो सकते हैं।
वह अपने करीबी लोगों के साथ इस विषय पर पहले ही चर्चा कर चुके हैं। इससे पहले सिद्दारमैया ने संकेत दिया था कि उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन के संबंध में शिकायत दर्ज कराई है और इस मामले की जांच का तरीका सही नहीं है।
इस बीच, दिल्ली में वेणुगोपाल के साथ हुई बैठक के दौरान कर्नाटक कांग्रेस के कई नेता सिद्दारमैया के साथ मौजूद थे।
स्टिंग ऑपरेशन के इस मामले ने कर्नाटक में राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। सीसीबी (सेंट्रल क्राइम ब्रांच) इस कथित स्टिंग ऑपरेशन, वीडियो के वायरल होने और इसे रिकॉर्ड किए जाने से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रही है।
सिद्दारमैया ने अपने खिलाफ हुए इस कथित स्टिंग ऑपरेशन को एक सुनियोजित ‘ब्लैकमेल साजिश’ बताया है। उन्होंने एक पत्रकार और मंगलुरु की कृपा अल्वा का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि इसमें इन्हीं लोगों का हाथ है। उनके इस बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। अब यह मामला राष्ट्रीय राजनीति के स्तर तक पहुंच गया है, जहां कांग्रेस के ही कुछ सदस्यों के इसमें शामिल होने के आरोप भी लग रहे हैं।
सिद्दारमैया ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल और अपने लंबे राजनीतिक करियर में उन पर कभी इस तरह के आरोप नहीं लगे। उन्होंने कुछ अज्ञात लोगों पर राजनीतिक हथकंडे के रूप में ब्लैकमेल का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और जोर देकर कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है।
सिद्दारमैया का कहना है कि सोशल मीडिया पर सामने आया वह वीडियो, जिसमें 2011 की एक घटना को लेकर यौन शोषण के दावे किए गए हैं पूरी तरह से बेबुनियाद है। उन्होंने इसे अपनी छवि खराब करने के लिए चलाया गया एक दुर्भावनापूर्ण राजनीतिक अभियान बताया है।
उन्होंने खुद बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मांग की है कि इस मनगढ़ंत मामले के असली दोषियों को बेनकाब करने के लिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए। उन्होंने बेंगलुरु सिटी सिविल एंड सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, ताकि समाचार पत्रों, टेलीविजन चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को उस असत्यापित वीडियो को प्रकाशित या प्रसारित करने से रोकने के लिए एक स्टे ऑर्डर प्राप्त की जा सके।
