Monday, June 22, 2026
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कर्नाटक एसएसएलसी परिणाम: 94 प्रतिशत से अधिक बच्चे पास, लड़कियां फिर रहीं आगे

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बेंगलुरु, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। कर्नाटक ने इस साल एसएसएलसी (कक्षा 10) परीक्षा-1 के परिणामों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 94.1 प्रतिशत पास दर हासिल की है। यह पिछले साल के 80.04 प्रतिशत के मुकाबले करीब 14 प्रतिशत अंकों की बड़ी बढ़ोतरी है।

इस वर्ष कुल 7,75,999 नियमित नए छात्रों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 7,70,209 परीक्षा में शामिल हुए। केवल 5,790 छात्र अनुपस्थित रहे और उपस्थिति दर 99.2 प्रतिशत रही। कुल 7,24,794 छात्र सफल हुए।

इस बार भी लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ दिया। लड़कियों का पास प्रतिशत 96.18 रहा, जबकि लड़कों का 91.94 प्रतिशत दर्ज किया गया। परीक्षा में 3,77,922 लड़कियां और 3,46,872 लड़के शामिल हुए थे।

राज्य सरकार ने इस साल न्यूनतम पासिंग मार्क्स 35 प्रतिशत से घटाकर 33 प्रतिशत कर दिए थे, जिससे 1,532 छात्रों को फायदा मिला।

ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों का प्रदर्शन (94.80%) शहरी छात्रों (93.2%) से बेहतर रहा। सरकारी स्कूलों में भी पास प्रतिशत में 16.8 प्रतिशत अंकों का उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। करीब 66.5 प्रतिशत छात्रों ने 60 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल किए।

वहीं, मंगलुरु जिला 98.40% के साथ पहले स्थान पर रहा। उडुपी (98.18%) दूसरे और कारवार (98.08%) तीसरे स्थान पर रहे, बेंगलुरु नॉर्थ (95.33%), बेंगलुरु रूरल (95.83%) और बेंगलुरु साउथ (91.64%) का प्रदर्शन भी अच्छा रहा और कलबुर्गी जिला 85.06% के साथ सबसे नीचे रहा।

इस वर्ष कई छात्रों ने पूर्ण 625 में 625 अंक हासिल किए, जिनमें प्रार्थना नागप्पा बिरादार पाटिल (बेलगावी), भरत जी (दावणगेरे), ब्रुंदा एम तापसे (चिक्कमगलुरु), धनुष सुधीर मैसूर (बेंगलुरु), प्रीतम जी पूजारी (उडुपी), सौजन्या बसवराज कंदाकुर (विजयपुरा) और सुखदेव (रायचूर) शामिल हैं।

कॉपी जांच 35 जिलों में 237 केंद्रों पर 16 अप्रैल तक पूरी कर ली गई थी। इस बार परिणाम एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिए भेजे गए, साथ ही पहली बार डीजीलॉकर पर भी मार्क्स कार्ड उपलब्ध कराए गए।

शिक्षा मंत्री मधु बंगरप्पा ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और अधिकारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए इसे सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया। अधिकारियों के अनुसार, इस साल सभी वर्गों और क्षेत्रों में संतुलित और बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला है, जो शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार का संकेत है।