नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि आज की दुनिया में उभरती और मध्यम शक्तियों के लिए सहयोग का एक बड़ा एजेंडा है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उभरती और मध्यम शक्तियों के बीच सहयोग के लिए एक रोडमैप रखा, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, व्यापार, लचीली आपूर्ति श्रृंखला, स्वास्थ्य सेवा, प्रतिभा गतिशीलता, कनेक्टिविटी, जलवायु कार्रवाई और रक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं।
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, “उभरती और मध्यम शक्तियों के लिए एजेंडा क्या हो सकता है? मैं कुछ विचारों के रूप में अपने विचार साझा करूंगा जो मेरे मन में आए। एक स्पष्ट रूप से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा होगी कि अगर संघर्ष चल रहे हैं, अगर टकराव है, अगर तनाव है तो सबसे बड़े देशों के अलावा, क्या अन्य राष्ट्र अपने संसाधनों को एक साथ ला सकते हैं, एक-दूसरे की कूटनीति का समर्थन कर सकते हैं, वहां कुछ करने की कोशिश कर सकते हैं।”
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच बातचीत अपने चरम पर पहुंच गई क्योंकि दोनों पक्षों को यह एहसास हुआ कि बदलती दुनिया में आर्थिक जुड़ाव को गहरा करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “एक और स्पष्ट क्षेत्र निश्चित रूप से निवेश और व्यापार ही है। इसका एक अच्छा उदाहरण इस साल भारत और यूरोपीय संघ के बीच जो हुआ, वह है कि हमने लगभग 25 साल तक बातचीत की और वह बातचीत अपने चरम पर पहुंची क्योंकि मुझे लगता है कि दोनों पक्षों को यह एहसास हुआ कि बदलती दुनिया में यह आवश्यक था कि हमारे आर्थिक जुड़ाव को तेज किया जाए और इसमें आने वाली बाधाओं को दूर किया जाए। अलग-अलग क्षेत्र हैं, मैं तर्क दूंगा, मध्यम और उभरते और मध्यम देशों, मध्यम खिलाड़ियों के एक साथ आने के लिए पर्याप्त कारण हैं।”
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज दुनिया की वास्तविकता यह है कि मांग वहां नहीं है जहां जनसांख्यिकी है और कहा कि इसे संतुलित करने का सबसे अच्छा तरीका प्रतिभा और कौशल के प्रवाह के माध्यम से है। उन्होंने कहा कि उन्नत विनिर्माण को टिकाऊ बने रहने के लिए एक निश्चित मात्रा में गतिशीलता की भी आवश्यकता होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उभरती और मध्यम शक्तियां आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन में सहयोग कर सकती हैं।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन एक है। जैसा कि मैंने कहा कि अलग-अलग देशों की अलग-अलग ताकतें हैं। चिप्स की दुनिया पर हावी होने या आज सेमीकंडक्टर उत्पादन के लिए आवश्यक मशीनों का उत्पादन करने के लिए आपको दुनिया का सबसे बड़ा देश होने की जरूरत नहीं है। आपके पास स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र हो सकते हैं। आज स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एपीआई और फार्मास्यूटिकल्स के अधिक विविध उत्पादन की आवश्यकता है।”
उन्होंने कहा कि मध्यम और उभरती शक्तियां कनेक्टिविटी और जलवायु कार्रवाई में सहयोग कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा जलवायु परिवर्तन का अनुभव करता है और जलवायु कार्रवाई पर सहयोग करने के लिए दुनिया में एक प्रमुख सोच और मजबूरी है।
डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भी अब पुराना समीकरण बदल रहा है- कौन बनाएगा और कौन खरीदेगा, ये पुरानी धारणाएं टूट रही हैं। अब स्मार्ट डिफेंस का दौर है, नए-नए प्रोड्यूसर सामने आ रहे हैं, और ये जरूरी नहीं कि पहले वाले देशों या कंपनियों में ही हों।
उन्होंने कहा, “रक्षा क्षेत्र, फिर से, एक ऐसा क्षेत्र है जिसने कुछ नाटकीय परिवर्तन देखे हैं, इसलिए मैं तर्क दूंगा कि आज उभरती और मध्यम शक्तियों के सहयोग के लिए एक बड़ा एजेंडा है। दुनिया बदल रही है। इसका एजेंडा बदल रहा है। परिदृश्य बदल रहा है। संरचना बदल रही है। मुझे बहुत खुशी है कि आज हमारे सामने एक शुरुआती बिंदु के रूप में यह मुद्दा है क्योंकि मुझे उम्मीद है कि यह हमारी बैठक को एक मजबूत उद्देश्य और एक स्पष्ट दिशा देगा क्योंकि हम अपनी चर्चाएं शुरू कर रहे हैं।”
