Monday, August 24, 2026
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सिम्बायोटेक फार्मालैब आईपीओ: कंपनी के खिलाफ 150.79 करोड़ रुपए के कानूनी मामले लंबित, आरएचपी में हुआ खुलासा

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नई दिल्ली, 24 अगस्त (आईएएनएस)। सिम्बायोटेक फार्मालैब के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) में खुलासा हुआ है कि कंपनी के पास टैक्स से जुड़े छह मामले और एक अहम सिविल केस लंबित है और इसमें 150.79 करोड़ रुपए की राशि शामिल है।

सिम्बायोटेक फार्मालैब का 1,757 करोड़ रुपए का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) सोमवार को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला और यह 27 अगस्त तक खुला रहेगा। फार्मास्युटिकल और बायोटेक्नोलॉजी कंपनी ने प्रति शेयर 938-988 रुपए का प्राइस बैंड तय किया है।

आरएचपी में कंपनी ने कहा कि उससे जुड़े कानूनी मामले अलग-अलग अदालतों और अधिकारियों के पास लंबित हैं। साथ ही, कहा कि ऐसे मामलों में कोई भी प्रतिकूल फैसला – चाहे अलग-अलग हो या कुल मिलाकर – उसकी प्रतिष्ठा, मैनेजमेंट के बने रहने, कारोबार, कामकाज के नतीजों, वित्तीय स्थिति और कैश फ्लो पर बुरा असर डाल सकता है।

आधिकारिक दस्तावजों में कंपनी के डायरेक्टर, सब्सिडियरी और प्रमोटर से जुड़े कानूनी मामलों की जानकारी भी दी गई है। प्रमोटरों को छोड़कर, डायरेक्टरों के खिलाफ दो आपराधिक और 11 टैक्स से जुड़े मामले चल रहे हैं, जिनमें कुल 41.2 लाख रुपए की रकम शामिल है।

कंपनी की सब्सिडियरी भी कानूनी मामलों में शामिल हैं। सब्सिडियरी के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है, जिसमें कुल 36.7 लाख रुपए की रकम शामिल है। आरएचपी में सब्सिडियरी से जुड़े एक अहम सिविल मुकदमे की जानकारी भी दी गई है।

प्रमोटरों के खिलाफ एक आपराधिक मामला, एक टैक्स से जुड़ा मामला और एक अहम सिविल केस की जानकारी दी गई है।

कंपनी की एक सब्सिडियरी, नोविया फार्मास्युटिकल प्राइवेट लिमिटेड, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक अहम सिविल केस में शामिल है। इस सब्सिडियरी ने ‘ड्राफ्ट पीतमपुरा मास्टर प्लान, 2035’ और रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर व मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए अधिग्रहित जमीन से जुड़े नोटिफिकेशन्स की वैधता को चुनौती देते हुए एक रिट याचिका दायर की थी।

आरएचपी के अनुसार, हाई कोर्ट ने 6 अप्रैल, 2023 और 22 अगस्त, 2023 के अपने आदेशों में संबंधित नोटिफिकेशन के अमल पर रोक लगा दी और नोटिस जारी किए; यह मामला अभी भी लंबित है।

कंपनी ने बताई गई कानूनी कार्यवाही को अपनी ‘मटेरियलिटी पॉलिसी’ के अनुसार वर्गीकृत किया है और कहा है कि बताई गई रकम उतनी ही है जितनी पता लगाई जा सकती है और जिसकी गणना की जा सकती है।