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तिरुविदान्ताई को तमिलनाडु के नए सचिवालय के लिए वैकल्पिक जगह के तौर पर देखा जा रहा

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चेन्नई, 22 सितंबर (आईएएनएस)। चेन्नई के फोरशोर एस्टेट में तमिलनाडु के प्रस्तावित विधानसभा-सह-सचिवालय परिसर के निर्माण की सरकारी योजना का विरोध बढ़ने के बीच, ईस्ट कोस्ट रोड पर स्थित तिरुविदान्ताई एक संभावित वैकल्पिक जगह के तौर पर फिर से चर्चा में आ गया है।

हालांकि, सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने उन खबरों को गलत बताया है, जिनमें कहा गया था कि ‘फोरशोर एस्टेट’ प्रस्ताव पर फिर से विचार किया जा रहा है या थिरुविदानथाई’ को वैकल्पिक जगह के तौर पर औपचारिक रूप से जांचा जा रहा है।

‘फोरशोर एस्टेट’ प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे राजनीतिक दलों और मछुआरों के संगठनों ने सरकार से अपील की है कि वह सिर्फ विधानसभा और सचिवालय की अलग इमारत बनाने से आगे की सोचें।

वे चाहते हैं कि एक ऐसी बड़ी जगह चुनी जाए, जहां एक इंटीग्रेटेड एडमिनिस्ट्रेटिव सिटी (एकीकृत प्रशासनिक शहर) बनाया जा सके, जो कई दशकों तक राज्य की जरूरतों को पूरा कर सके।

‘ईस्ट कोस्ट रोड’ कॉरिडोर का सुझाव इसलिए दिया गया है, क्योंकि वहां जमीन का बड़ा हिस्सा उपलब्ध है और भविष्य में विस्तार की संभावना भी है।

इस बहस ने ‘थिरुविदानथाई-थैयायूर’ इलाके में एक एडमिनिस्ट्रेटिव सिटी बनाने के सरकार के पुराने प्रस्ताव को भी फिर से चर्चा में ला दिया है।

2000 के दशक की शुरुआत में राज्य सरकार ने चेन्नई के बाहर एक बड़ा एडमिनिस्ट्रेटिव सेंटर बनाने की योजना पर विचार किया था। शुरुआती प्रस्ताव में मल्लापुरम के पास लगभग 2,000 एकड़ जमीन शामिल थी, लेकिन बाद में ध्यान ‘थिरुविदानथाई’ और उससे सटे ‘थैयायूर’ इलाके की ओर चला गया।

इस योजना का दायरा सिर्फ एक नई सचिवालय इमारत बनाने से कहीं अधिक बड़ा था। इसमें कई सरकारी दफ्तरों को दूसरी जगह ले जाना और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना भी शामिल था। इसे तुरंत लागू करने के बारे में नहीं सोचा गया, क्योंकि अधिकारियों का अनुमान था कि इतने बड़े पैमाने पर एक एडमिनिस्ट्रेटिव सिटी बनाने में 15 से 20 साल लग सकते हैं।

इसके बाद सरकार ने चेन्नई में नई सचिवालय बिल्डिंग बनाने के लिए कई जगहों पर विचार किया, जिनमें शिक्षण संस्थानों के कैंपस भी शामिल थे।

फोरशोर एस्टेट वाली जगह का विरोध करने वाले मछुआरों के संगठनों ने अब तिरुविदानथाई को एक सही विकल्प बताया है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि सेंट्रल चेन्नई से दूर होने के कारण वहां तक बेहतर सड़क और पब्लिक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी होना जरूरी होगा। दूसरे जिलों से आने वाले लोगों के लिए भी वहां पहुँचना आसान होना चाहिए।

विपक्षी पार्टियों ने सुझाव दिया है कि इस प्रोजेक्ट को सिर्फ एक बिल्डिंग तक सीमित रखने के बजाय, चेन्नई के बाहर 500 से 1,000 एकड़ जमीन पर एक इंटीग्रेटेड एडमिनिस्ट्रेटिव सिटी बनाई जाए।

अंतिम फैसला लेने के लिए जमीन की उपलब्धता, ट्रांसपोर्ट लिंक, पर्यावरण पर असर और इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत का विस्तार से आकलन करना होगा। भविष्य में विस्तार की गुंजाइश, आपदा से निपटने की क्षमता और आम जनता की पहुंच भी अहम होगी, क्योंकि प्रस्तावित एडमिनिस्ट्रेटिव हेडक्वार्टर से तमिलनाडु को अगली सदी तक सेवा मिलने की उम्मीद है।