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तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष ने टीवीके सरकार पर हिंदू धार्मिक अधिकारों में दखल देने का लगाया आरोप

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चेन्नई, 5 नवंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने पुदुकोट्टई जिले के लिंगमलाई में प्रस्तावित ईसाई प्रार्थना सभा को लेकर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने प्रशासन पर हिंदू धार्मिक प्रथाओं में दखल देने और समुदाय के धार्मिक अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया है।

नागेंद्रन ने गुरुवार को जारी बयान में आरोप लगाया कि मलम्पट्टी के पास लिंगमलाई में 400 साल पुराने शिव मंदिर के निकट ईसाई प्रार्थना सभा आयोजित करने की तैयारी की जा रही है जबकि ऐसी गतिविधियों पर रोक है।

उन्होंने दावा किया कि यह प्रस्तावित सभा 24 नवंबर को ‘महा कार्तिगई’ त्योहार के दिन होनी थी और यह उस जगह के पास आयोजित की जानी थी जहां कथित तौर पर बिना अनुमति के एक क्रॉस (ईसाई प्रतीक) लगाया गया है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि लिंगमलाई ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, यहां प्राचीन शिव मंदिर के अलावा चोल-युगीन शिलालेख, मूर्तियां और नंदी की एक प्रतिमा भी मौजूद है। उन्होंने मारिमुथु नामक एक हिंदू श्रद्धालु पर हुए कथित हमले की भी निंदा की, जिन्होंने कथित तौर पर इस प्रार्थना सभा का विरोध किया था।

सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए नागेंद्रन ने प्रशासन पर जानबूझकर हिंदू धार्मिक परंपराओं में बाधा डालने का आरोप लगाया।

मदुरै की तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर ‘कार्तिगई दीपम’ जलाने को लेकर हुए विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्थापित धार्मिक प्रथाओं पर रोक लगा रही है।

उन्होंने मुख्यमंत्री विजय से आग्रह किया कि वे ठोस कदम उठाकर यह दिखाएं कि उनका प्रशासन सभी धार्मिक समुदायों के लोगों का प्रतिनिधित्व करता है।

इस बीच, वरिष्ठ भाजपा नेता एच. राजा ने सरकार पर हिंदू रीति-रिवाजों और धार्मिक परंपराओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। राजा ने विजयादशमी के दिन बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाने की पारंपरिक प्रथा पर लगाई गई कथित पाबंदियों पर सवाल उठाए और इस समारोह को हिंदू संस्कृति का एक अहम हिस्सा बताया।

उन्होंने मदुरै सेंट्रल के विधायक मुस्तफा के मीनाक्षी अम्मन मंदिर जाने का भी जिक्र किया और सत्ताधारी दल के कुछ प्रतिनिधियों के हिंदू धार्मिक भावनाओं के प्रति रवैये की आलोचना की।

इसके अलावा, राजा ने सरकार की धर्मनिरपेक्ष साख पर भी सवाल उठाए और वरिष्ठ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों तथा मंत्रियों की धार्मिक संबद्धताओं की ओर इशारा किया। दोनों नेताओं ने मांग की कि सरकार हिंदू धार्मिक मामलों में दखल न दे और सभी समुदायों को समान सुरक्षा सुनिश्चित करे। राज्य सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तुरंत उपलब्ध नहीं हो सकी।