मदुरै, 9 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मंत्री निर्मल कुमार ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रक्रिया के कारण तमिलनाडु का संसद में प्रतिनिधित्व कम होता है, तो यह राज्य के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करने जैसा होगा। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके इस विवादित मुद्दे पर अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा का समर्थन करने की तैयारी कर रही है।
रविवार को मदुरै को कचरा मुक्त शहर बनाने की पहल के तहत आयोजित मैराथन में हिस्सा लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए निर्मल कुमार ने कहा कि तमिलनाडु की सभी पार्टियों को परिसीमन के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।
निर्मल कुमार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अभी सिर्फ राजनीतिक कारणों से परिसीमन प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। तमिलनाडु ने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया है। अगर सीटों का बंटवारा सिर्फ जनसंख्या के आधार पर हुआ तो राज्य को संसद में कम सीटें मिल सकती हैं। इससे तमिलनाडु की राजनीतिक आवाज कमजोर होगी और राज्य के कुछ वर्ग हाशिए पर चले जाएंगे।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राज्य के अधिकारों की रक्षा करना सबसे जरूरी है। सभी दलों को तमिलनाडु के हितों के खिलाफ जाने वाले किसी भी प्रस्ताव के खिलाफ एकजुट मोर्चा बनाना चाहिए।
तमिलनाडु सरकार के मंत्री ने डीएमके पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जानकारी मिली है कि डीएमके ने इस मुद्दे पर भाजपा से अप्रत्यक्ष समझौता कर लिया है।
निर्मल कुमार ने दावा किया कि ऐसी खबरें हैं कि जब परिसीमन का मुद्दा संसद में आएगा तो डीएमके के सदस्य इसके खिलाफ वोट करने के बजाय सदन से वॉकआउट कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वॉकआउट करना सीधे विरोध न करके प्रस्ताव को अप्रत्यक्ष समर्थन देने जैसा होगा।
उन्होंने डीएमके की पुरानी स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी पहले खुद को परिसीमन की सबसे बड़ी विरोधी बताती थी। अगर डीएमके सच में विरोध करती है तो उसे संसद में रहकर प्रस्ताव के खिलाफ वोट करना चाहिए।
निर्मल कुमार ने कहा कि किसी भी वॉकआउट को वह तमिलनाडु और उन सभी राज्यों के साथ गंभीर धोखा मानते हैं, जिन्हें जनसंख्या आधारित सीटों के बंटवारे से नुकसान हो सकता है।

