जम्मू, 30 जून (आईएएनएस)। अमरनाथ यात्रा के लिए टोकन बांटने की प्रक्रिया मंगलवार को जम्मू में शुरू कर दी गई। यहां पर कड़ी सुरक्षा में यह प्रक्रिया जारी है।
प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए इस जगह पर 10 टोकन वितरण काउंटर बनाए हैं। कुल 1,600 टोकन जारी किए गए हैं, जिनमें से 800 पहलगाम रूट के लिए और 800 बालटाल रूट के लिए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को टोकन पाने वाले तीर्थयात्री पवित्र यात्रा पर जाने से पहले बुधवार से अपना रजिस्ट्रेशन पूरा कर सकेंगे। टोकन का वितरण सुचारू और सुरक्षित ढंग से हो, इसके लिए तवी रिवर फ्रंट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इलाके में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं और अधिकारी सभी तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
अमरनाथ यात्रा के लिए, जम्मू जिला प्रशासन ने 18 ऑन-द-स्पॉट रजिस्ट्रेशन और टोकन काउंटर बनाए हैं। इनमें से दस टोकन काउंटर तवी रिवरफ्रंट सेंटर पर काम करते हैं जबकि अन्य काउंटर गीता भवन, राम मंदिर (पुरानी मंडी), भगवती नगर और रेलवे स्टेशन पर हैं।
टोकन जारी करने का काम पारदर्शी तरीके से सुबह 6:00 बजे शुरू होता है। हर तीर्थयात्री (परिवार के सदस्यों सहित) को लाइन में अलग-अलग खड़ा होना पड़ता है। हर पात्र व्यक्ति को सिर्फ एक टोकन जारी किया जाता है। टोकन मिलने के अगले दिन टोकन धारकों का ई-केवाईसी और आरएफआईडी रजिस्ट्रेशन किया जाता है।
अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई को शुरू होगी और 28 अगस्त को समाप्त होगी। समुद्र तल से 3880 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह गुफा मंदिर कश्मीर हिमालय में अनंतनाग जिले में है। यात्री या तो लंबे पारंपरिक पहलगाम बेस कैंप रूट का इस्तेमाल करते हैं या छोटे बालटाल रूट का।
पहलगाम रूट का इस्तेमाल करने वाले लोग चार दिन बाद गुफा मंदिर तक पहुंचते हैं जबकि बालटाल रूट का इस्तेमाल करने वाले लोग गुफा मंदिर के अंदर ‘दर्शन’ करने के बाद उसी दिन बेस कैंप लौट आते हैं। गुफा मंदिर में बर्फ से बनी एक संरचना (स्टैलेग्माइट) है, जो चांद की कलाओं के साथ घटती-बढ़ती रहती है।
भक्तों का मानना है कि बर्फ की यह संरचना भगवान शिव की अलौकिक शक्तियों का प्रतीक है। चूंकि दो बेस कैंप से गुफा मंदिर तक के रास्ते को ‘नो-फ़्लाई ज़ोन’ घोषित कर दिया गया है, इसलिए इस साल की यात्रा के दौरान भक्तों के लिए कोई हेलीकॉप्टर उपलब्ध नहीं है।

