तृणमूल सांसद सायोनी घोष ने आईपैक के ‘दबदबे’ का किया जिक्र, पार्टी के अंदर ‘संवाद की कमी’ को स्वीकारा

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कोलकाता, 20 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में जोरदार चुनावी झटके के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर मंथन का दौर जारी है। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस की सांसद सायोनी घोष ने पहली बार पार्टी के भीतर बढ़ते ‘कम्युनिकेशन गैप’ और आईपैक के बढ़ते प्रभाव पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने माना कि पार्टी में कहीं न कहीं संवाद की कमी बनी, जिसकी वजह आईपैक का बढ़ता ‘डॉमिनेंस’ भी रहा।

आईएएनएस से बातचीत में सायोनी घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस एक बेहद लोकतांत्रिक पार्टी है, लेकिन यह सच है कि समय के साथ आईपैक का प्रभाव लगातार बढ़ रहा था। आईपैक ने 2021 में बहुत अच्छा काम किया था और 2024 में भी अच्छे नतीजे दिए थे, लेकिन इस बार वह वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाया।

सायोनी घोष ने माना कि अब सिर्फ आईपैक ही नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस को भी आत्ममंथन करने की जरूरत है। अगर लोग ऐसी बातें कह रहे हैं और उसके पीछे कोई वजह है, तो उस पर ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने पार्टी के भीतर किसी तरह के आंतरिक संघर्ष की बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि एक युवा नेता होने के नाते उन्होंने हमेशा अपने कार्यालय, युवा कार्यकर्ताओं और पार्टी नेतृत्व के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है।

सायोनी घोष ने यह भी कहा कि वे पूरी तरह गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि से आती हैं। इसके बावजूद उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं और नेतृत्व का भरपूर समर्थन मिला। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि राजनीति में हर किसी को खुश रखना संभव नहीं होता।

पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा सार्वजनिक रूप से नेतृत्व पर सवाल उठाने को लेकर भी सायोनी घोष ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “अगर किसी को शिकायत थी, तो पहले भी कही जा सकती थी। अब जब पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, तब टीवी पर आकर ऐसी बातें कहना सही नहीं है।”

वहीं, भाजपा नेता से जान से मारने की धमकी मिलने के मामले पर भी सायोनी घोष ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं के खिलाफ नफरत और अपराध को सामान्य बनाने की कोशिश कर रही है। अगर एक सांसद होने के बावजूद मुझे ऐसी धमकियों का सामना करना पड़ रहा है, तो देश के आम नागरिकों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है।

सायोनी घोष ने कहा कि शायद उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे संसद के भीतर और बाहर हमेशा विरोध की आवाज उठाती रही हैं। मेरे सीमित राजनीतिक अनुभव में मुझे लगता है कि भाजपा को विरोध की आवाज पसंद नहीं है। उन्हें विपक्ष का अस्तित्व पसंद नहीं है और न ही महिलाओं का खुलकर बोलना।

उन्होंने पश्चिम बंगाल की महिलाओं का जिक्र करते हुए कहा, “बंगाली महिलाएं बेहद मजबूत होती हैं। हमारी नेता ममता बनर्जी भी बेहद मजबूत हैं। उन्होंने इस धमकी को लेकर कोलकाता पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है।”