त्रिपुरा में नदी कटाव रोकने के लिए 193 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं लागू की जाएंगी: मुख्यमंत्री साहा

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अगरतला, 16 मई (आईएएनएस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शनिवार को कहा कि बाढ़ नियंत्रण के लिए राज्य में कुल 42 बांधों का निर्माण पहले ही हो चुका है और राज्य भर की विभिन्न नदियों में कटाव रोकने के लिए अतिरिक्त 193 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं लागू की जाएंगी।

अगरतला में राज्य डेटा केंद्र का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सतत प्रगति सुनिश्चित करने के लिए अवसंरचना विकास के साथ-साथ कार्य के हर क्षेत्र में सुधार आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप सुधार कार्य कर रही है। इसने शासन और विकास गतिविधियों में उन्नत प्रौद्योगिकी को एकीकृत करके विकास की राह को जारी रखा है। राज्य डेटा केंद्र की स्थापना से राज्य की कृषि भूमि में सिंचाई व्यवस्था का विस्तार करने में मदद मिलेगी और यह बाढ़ नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। किसी राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि उस राज्य के कृषि उत्पादन से भी घनिष्ठ रूप से जुड़ी होती है।

राज्य डेटा केंद्र की स्थापना लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत जल संसाधन विभाग द्वारा अगरतला के बाहरी इलाके कुंजबन स्थित विश्वेश्वरैया परिसर में की गई है।

डेटा केंद्र की स्थापना को राज्य के लिए एक मील का पत्थर बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र से प्राप्त सटीक और वास्तविक समय की जानकारी से बाढ़ प्रबंधन और आपदा तैयारियों में उल्लेखनीय सुधार होगा।

उन्होंने कहा कि इस डेटा केंद्र से प्राप्त सटीक जानकारी बाढ़ नियंत्रण गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण न केवल ज्ञान बढ़ाना है, बल्कि प्रशासन और विकास में आधुनिक प्रौद्योगिकी को एकीकृत करना भी है। इसी दृष्टिकोण के अनुरूप, राज्य सरकार प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने के लिए त्रिस्तरीय ई-ऑफिस प्रणाली भी शुरू कर रही है। इस डेटा केंद्र की स्थापना से राज्य की जल संसाधन प्रबंधन प्रणाली और भी मजबूत और समृद्ध होगी।

साहा ने आगे कहा कि राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना का शुभारंभ 2016-17 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की एक प्रमुख पहल के अंतर्गत किया गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना के अंतर्गत इस राज्य डेटा केंद्र के निर्माण के लिए पहले चरण में 4.67 करोड़ रुपए खर्च किए गए। दूसरे चरण में डेटा केंद्र के आगे विकास के लिए अतिरिक्त 4.50 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

सिंचाई क्षेत्र में राज्य सरकार की पहलों पर प्रकाश डालते हुए साहा ने कहा कि 31 मार्च (2026) तक त्रिपुरा में कुल 1,23,754 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के दायरे में लाया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने अधिक कृषि भूमि को सिंचाई सुविधाओं के अंतर्गत लाने के लिए कई पहलें की हैं।