वॉशिंगटन, 8 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष खत्म होते ही अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें तेजी से नीचे आ जाएंगी। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए ईंधन और कृषि लागत में हुई अस्थायी बढ़ोतरी एक जरूरी कीमत है।
एनबीसी के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने माना कि ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर अमेरिकी किसानों पर पड़ा है, लेकिन उनका कहना था कि यह आर्थिक दबाव ज्यादा समय तक नहीं रहेगा और उनकी सरकार की कार्रवाई सही है।
जब उनसे किसानों की बढ़ती ईंधन और खाद की लागत को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, “जैसे ही यह मामला खत्म होगा, पेट्रोल की कीमतें तेजी से गिर जाएंगी।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के साथ संघर्ष के आर्थिक असर को लेकर व्हाइट हाउस पर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका द्वारा पहली सैन्य कार्रवाई के बाद से यह संघर्ष अब 100वें दिन में पहुंच चुका है।
किसानों की आर्थिक परेशानियों पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि ग्रामीण अमेरिका आज भी उन पर भरोसा करता है।
उन्होंने कहा, “मैं किसानों से प्यार करता हूं और किसान मुझसे प्यार करते हैं। किसान मुझ पर भरोसा करते हैं।”
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में किसानों को दी गई सहायता का जिक्र करते हुए कहा, “मैंने उन्हें 28 अरब डॉलर दिए थे।”
राष्ट्रपति ने कहा कि उनके सामने दो विकल्प थे – या तो ऊर्जा की कीमतें कम बनाए रखें या फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम से पैदा हो रहे खतरे के खिलाफ कार्रवाई करें।
उन्होंने कहा, “मैं कीमतों को उसी तरह बनाए रख सकता था, लेकिन मैंने सोचा कि मुझे थोड़ा अलग रास्ता अपनाना होगा। किसान इसे सबसे बेहतर समझेंगे। पेट्रोल की कीमतें कुछ बढ़ेंगी, खाद की कीमतें भी थोड़ी बढ़ेंगी, लेकिन मैं बहुत खतरनाक लोगों के हाथों में परमाणु हथियार नहीं जाने दूंगा।”
ट्रंप ने बार-बार कहा कि या तो ईरान के साथ समझौता होने पर या फिर अमेरिकी सैन्य अभियान पूरा होने के बाद ईंधन की कीमतें कम हो जाएंगी।
जब उनसे पूछा गया कि क्या पेट्रोल की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, “कीमतें बहुत नीचे आएंगी। वे पहले से भी कम हो जाएंगी।”
ट्रंप ने कहा, “यह इस पर निर्भर करता है कि युद्ध कहां तक जाता है। हो सकता है हमें और कार्रवाई करनी पड़े या फिर हम कोई समझौता कर लें। अगर समझौता हो जाता है तो कीमतें अभी कम हो जाएंगी, नहीं तो अभियान खत्म होने के बाद कम होंगी।”
पूरे इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने ईरान संघर्ष को संभालने के अपने तरीके का बचाव किया और इस बात को खारिज किया कि इससे विदेशों में लंबे समय तक सैन्य हस्तक्षेप से बचने के उनके वादे पर असर पड़ा है।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से ईरान की क्षमताएं काफी कमजोर हुई हैं और यह संघर्ष लंबे समय तक नहीं चलेगा।
ट्रंप ने कहा, “हम वहां लंबे समय तक नहीं रहने वाले हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि हालिया अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट उम्मीद से बेहतर रही है, जो दिखाती है कि संघर्ष के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
ट्रंप ने रोजगार के आंकड़ों को “बहुत मजबूत” बताया और कहा कि देश रिकॉर्ड आर्थिक प्रदर्शन कर रहा है।

