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पेरियार और अन्ना की जयंती रैलियों पर रोक से भड़की डीएमके, उधयनिधि ने उठाए सवाल

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चेन्नई, 14 सितंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु के विपक्ष के नेता उधयनिधि स्टालिन ने सोमवार को समाज सुधारक पेरियार ई.वी. रामासामी और पूर्व मुख्यमंत्री सी.एन. अन्नादुरई की जयंती पर प्रस्तावित रैलियों को अनुमति न दिए जाने को लेकर पुलिस की कड़ी आलोचना की।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी डीएमके समेत अन्य दलों द्वारा आयोजित की जाने वाली इन रैलियों को रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उधयनिधि ने पुलिस के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे अनुचित बताया और सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।

सोशल मीडिया पोस्ट में उदयनिधि स्टालिन ने सवाल किया कि पुलिस ने इन कार्यक्रमों की इजाजत क्यों नहीं दी, जबकि राज्य में दक्षिणपंथी समूहों द्वारा आयोजित रैलियों को इजाजत दी गई थी। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर फिर से विचार करने और कार्यक्रमों के लिए तुरंत मंजूरी देने की अपील की।

उनके अनुसार, डीएमके ने समाज सुधारक की जयंती मनाने के लिए 17 सितंबर को पेरियार के जन्मस्थान इरोड में एक रैली आयोजित करने की योजना बनाई थी। एक और रैली ‘पेरारिग्नार अन्ना’ के नाम से मशहूर अन्नादुरई की जयंती मनाने के लिए गुडियाथम में प्रस्तावित थी।

गुडियाथम कार्यक्रम डीएमके और कई अन्य राजनीतिक पार्टियों द्वारा मिलकर आयोजित किया जाना था। उदयनिधि स्टालिन ने पुलिस की इजाजत न मिलने को अस्वीकार्य बताया और आरोप लगाया कि सरकार यह तय करते समय अलग-अलग मापदंड अपना रही है कि कौन से राजनीतिक और सामाजिक संगठन सार्वजनिक जुलूस निकाल सकते हैं।

उन्होंने पूछा कि पुलिस, जो सीधे मुख्यमंत्री के नियंत्रण में काम करती है, उसने दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा आयोजित रैलियों को तो इजाजत दे दी, लेकिन पेरियार और अन्ना के सम्मान में होने वाले कार्यक्रमों को रोक दिया, ये दोनों नेता ऐसे थे जिन्होंने तमिलनाडु के सामाजिक और राजनीतिक विकास पर गहरा प्रभाव डाला था।

विपक्ष के नेता ने मुख्यमंत्री द्वारा पेरियार और अन्ना को बार-बार वैचारिक मार्गदर्शक बताए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि उनकी याद में आयोजित रैलियों की इजाजत न देकर सरकार किसे खुश करने की कोशिश कर रही है। उदयनिधि स्टालिन ने आरोप लगाया कि इस फैसले से शक पैदा होता है कि क्या राज्य पुलिस मुख्यमंत्री के अधिकार के तहत स्वतंत्र रूप से काम कर रही है या भगवा राजनीति से जुड़ी ताकतों के दबाव में झुक रही है।

उन्होंने सरकार पर राजनीतिक अहंकार दिखाने और दो द्रविड दिग्गजों की विरासत का सम्मान न करने का आरोप लगाया। डीएमके नेता ने कहा कि तमिलनाडु के लोग सरकार के कामों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और वे दक्षिणपंथी राजनीतिक हितों के प्रति सरकार के झुकाव वाले रवैये को पहचान लेंगे।

उदयनिधि स्टालिन ने पुलिस के फैसले को तुरंत पलटने की मांग करते हुए कहा कि प्रस्तावित रैलियों को तय नियमों के अनुसार शांतिपूर्ण ढंग से होने दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेरियार और अन्ना को याद करना तमिलनाडु के सामाजिक न्याय, तर्कवाद, भाषाई गौरव और आत्म-सम्मान के इतिहास का एक अहम हिस्सा है।