न्यूयॉर्क, 5 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की हालिया न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान वायरल हुए कुछ वीडियो और तस्वीरों में भारतीय तिरंगे का कथित अपमान किए जाने की घटना पर एक रिपोर्ट में गहरी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस तिरंगे के लिए सिख सैनिकों ने गोलियां खाईं और सर्वोच्च बलिदान दिया, उसी राष्ट्रीय ध्वज को विदेश में पैरों तले रौंदना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
‘खालसा वॉक्स’ की इस सप्ताह प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ लोगों की इस हरकत को पूरे सिख समुदाय से जोड़ना गलत होगा। दुनिया भर में करोड़ों सिख रहते हैं और कुछ अपवादों को छोड़कर अधिकांश सिख अपने देश, समाज और मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हैं और उनका पालन करते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय तिरंगा केवल तीन रंगों का कपड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की पहचान, देश की संप्रभुता और आजादी के लिए दिए गए अनगिनत बलिदानों का प्रतीक है। तिरंगे का सम्मान किसी राजनीतिक दल, सरकार या विचारधारा का नहीं, बल्कि हर नागरिक का राष्ट्रीय कर्तव्य है।
रिपोर्ट के अनुसार, तिरंगे का अपमान केवल राष्ट्रीय ध्वज का नहीं, बल्कि देश के सम्मान का अपमान है। इसमें सवाल उठाया गया कि यदि कोई व्यक्ति सिख वेशभूषा में ऐसा करता है, तो क्या केवल पगड़ी पहन लेने और दाढ़ी रखने से कोई सच्चा सिख बन जाता है।
रिपोर्ट में सिख समुदाय के देश के प्रति योगदान का उल्लेख करते हुए कहा गया कि सिखों ने केवल नारों से नहीं, बल्कि अपने खून से देशभक्ति का इतिहास लिखा है। जब-जब देश की सीमाओं पर खतरा आया, सिख सैनिक अग्रिम मोर्चे पर डटे रहे और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।
रिपोर्ट में कहा गया कि आज भी जब किसी शहीद सैनिक का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर उसके घर पहुंचता है, तो वह ध्वज परिवार के दुख, सैनिक के बलिदान और राष्ट्र के प्रति उसकी अंतिम निष्ठा का प्रतीक होता है। ऐसे अनगिनत सिख सैनिक हैं जिन्होंने भारत की रक्षा करते हुए अपने प्राण गंवाए हैं।
रिपोर्ट में चिंता जताई गई कि विदेशों में बैठे कुछ लोग सिख पहचान को भारत विरोधी गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इससे न केवल भारत की छवि प्रभावित होती है, बल्कि सेवा, साहस, परिश्रम और बलिदान के लिए दुनिया भर में सम्मानित सिख समुदाय की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि विदेशी धरती पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने वाले लोगों को समझना चाहिए कि वे किसी सरकार या राजनीतिक संगठन का नहीं, बल्कि उस राष्ट्र के प्रतीक का अपमान कर रहे हैं, जिससे करोड़ों भारतीय परिवारों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। सिख समुदाय के लिए यह सवाल और भी अधिक गंभीर है।
