Friday, August 21, 2026
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तमिलनाडु चुनाव: सेलम में शक्ति प्रदर्शन से पहले राहुल गांधी की चुप्पी से बढ़ी डीएमके की चिंता, तालमेल पर उठे सवाल

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चेन्नई, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने वाले हैं, जिसके लिए अब सिर्फ नौ दिन बचे हैं। पूरे राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं, लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भागीदारी को लेकर बनी अनिश्चितता डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए लगातार परेशानी का सबब बनी हुई है।

सत्ताधारी डीएमके ‘सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस’ के बैनर तले 15 अप्रैल को सेलम में एक बड़ी जनसभा की तैयारी कर रही है।

पार्टी के नेता चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में अपनी एकता और ताकत का प्रदर्शन करने के लिए काफी उत्सुक हैं, हालांकि इस रैली में आमंत्रित किए गए राहुल गांधी की तरफ से अभी तक कोई पुष्टि न मिलने के कारण डीएमके नेतृत्व के भीतर बेचैनी बढ़ गई है।

सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के चुनावी कार्यक्रम को लेकर स्पष्टता की कमी ने डीएमके और उसके प्रमुख सहयोगी दल, कांग्रेस के बीच तालमेल को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

यह मुद्दा गठबंधन को लेकर हुई बातचीत के दौरान सामने आए उन शुरुआती मतभेदों की पृष्ठभूमि में आया है, जिन्होंने दोनों दलों के बीच चुनावी साझेदारी को अंतिम रूप दिए जाने से पहले कुछ समय के लिए उनके संबंधों में तनाव पैदा कर दिया था।

हाल के हफ्तों में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ राहुल गांधी की सीमित संयुक्त उपस्थिति ने इस स्थिति को और भी अधिक जटिल बना दिया है। हालांकि दोनों नेताओं ने इससे पहले पुडुचेरी में एक ही दिन चुनाव प्रचार किया था, लेकिन वे एक ही मंच पर नजर नहीं आए थे।

इसी तरह, चेन्नई और कोयंबटूर के दौरों पर भी दोनों नेताओं की कोई संयुक्त चुनावी सभा आयोजित नहीं की गई, जिससे दोनों दलों के बीच तालमेल की कमी को लेकर चल रही अटकलों को और भी अधिक बल मिला है।

कांग्रेस पार्टी के भीतर भी राहुल गांधी की योजनाओं को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां एक ओर तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ प्रभारी गिरीश चोडनकर ने उम्‍मीद जताई है कि राहुल गांधी जल्द ही चुनाव प्रचार में शामिल होंगे, वहीं दूसरी ओर पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है, जिससे अनिश्चितता और भी अधिक बढ़ गई है।

सूत्रों के मुताबिक, डीएमके का नेतृत्व चुनाव प्रचार के इस बेहद महत्वपूर्ण अंतिम चरण में राहुल गांधी की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है, क्योंकि वे इस कड़े मुकाबले वाले चुनाव में एक एकजुट मोर्चे के महत्व को भली-भांति समझते हैं।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना ​​है कि राहुल गांधी की उपस्थिति से पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भर जाएगा और मतदाताओं के बीच गठबंधन के संदेश को और भी अधिक मजबूती मिलेगी।

जैसे-जैसे मतदान का दिन नजदीक आ रहा है, डीएमके और कांग्रेस के बीच बदलते समीकरण विशेष रूप से राहुल गांधी की भागीदारी से जुड़ा प्रश्न तमिलनाडु की राजनीतिक दिशा और दशा तय करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।