Sunday, May 24, 2026
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केंद्र पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए 32.51 करोड़ रुपए की मत्स्यपालन परियोजनाएं शुरू करेगी

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नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह सोमवार को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) और मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ) के तहत लगभग 32.15 करोड़ रुपए की प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन और आधारशिला रखेंगे।

मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र में आत्मनिर्भर मत्स्यपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने और उसे विकसित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाती है।

मंत्रालय के मुताबिक, इन परियोजनाओं का उद्घाटन मिजोरम के आइजोल में “क्षेत्रीय समीक्षा बैठक: पूर्वोत्तर क्षेत्र 2026” में किया जाएगा। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री सिंह करेंगे।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री पूर्वोत्तर क्षेत्र के मत्स्यपालन लाभार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित करेंगे, जिनमें मत्स्यपालन केसीसी कार्ड और सर्वश्रेष्ठ मत्स्यपालन स्टार्टअप और मत्स्य सहकारी समितियों के लिए पुरस्कार शामिल हैं। साथ ही, केंद्रीय मंत्री लाभार्थियों से बातचीत करके क्षेत्र में मत्स्यपालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए चुनौतियों और आवश्यक सहयोग को भी समझेंगे।

इस बैठक में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन भी शामिल होंगे।

इसके अलावा, इस क्षेत्रीय समीक्षा बैठक में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के मत्सय पालन और पशुपालन विभाग के मंत्री भी भाग लेंगे। मत्स्यपालन विभाग और पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिवों के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहेंगे। यह कार्यक्रम हाइब्रिड मोड में आयोजित किया जाएगा।

इस बैठक में राज्य मत्स्यपालन मंत्री, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और प्रमुख मत्स्यपालन संस्थानों के प्रतिनिधि पूर्वोत्तर क्षेत्र में मत्स्यपालन क्षेत्र को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। इन चर्चाओं में उत्पादन बढ़ाने, मूल्य श्रृंखला में मौजूद कमियों को दूर करने, बाजार संबंधों को बेहतर बनाने और निर्यात को बढ़ावा देने पर केंद्रित विचार-विमर्श किया जाएगा, साथ ही राज्यों को सहयोग देने के लिए व्यावहारिक रणनीतियों की पहचान की जाएगी।