अमेरिका के जहाजों की जब्ती से ईरान संघर्ष का नया चरण शुरू: रिपोर्ट

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वाशिंगटन, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान के साथ जारी तनाव के बीच समुद्र में अमेरिकी कार्रवाई अब एक नए चरण में प्रवेश करती दिख रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने फारस की खाड़ी से दूर हिंद महासागर तक अपने ऑपरेशन बढ़ाते हुए ईरानी तेल आपूर्ति को रोकने की रणनीति तेज कर दी है।

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने मंगलवार को हिंद महासागर में एक ऐसे तेल टैंकर को जब्त किया, जिस पर ईरानी तेल ले जाने का संदेह था। यह कार्रवाई श्रीलंका और इंडोनेशिया के बीच अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई, जो इस बात का संकेत है कि अमेरिका अब मिडिल ईस्ट से बाहर भी सक्रिय रूप से दखल दे रहा है।

यह कदम डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के उस व्यापक निर्देश का हिस्सा है, जिसके तहत ईरान के तथाकथित “डार्क फ्लीट” को निशाना बनाया जा रहा है। यह फ्लीट कथित तौर पर प्रतिबंधों से बचकर तेल निर्यात में मदद करती है।

रिपोर्ट के अनुसार, जब्त किया गया टैंकर करीब 20 लाख बैरल तेल ले जाने में सक्षम था। अमेरिकी सैनिकों ने बिना किसी प्रतिरोध के जहाज पर चढ़कर उसे कब्जे में लिया, जिससे अमेरिका की बढ़ती सैन्य पहुंच का संकेत मिलता है।

यह समुद्री अभियान ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का हिस्सा है, जिसे अमेरिकी नौसेना और वायुसेना लागू कर रही हैं। फॉक्स न्यूज और द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, 13 अप्रैल से शुरू हुई इस नाकेबंदी के बाद अब तक करीब 28 जहाजों को वापस लौटने या मार्ग बदलने के लिए मजबूर किया गया है।

ट्रंप ने इस अभियान को “बेहद सफल” बताते हुए कहा है कि अमेरिका अब होर्मुज पर “पूरी तरह नियंत्रण” रखता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युद्धविराम को आगे बढ़ाते हुए सैन्य तैयारियां जारी रहेंगी।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा, “ मैंने अपनी सेना को नाकाबंदी जारी रखने और बाकी सभी मामलों में तैयार रहने का निर्देश दिया है।”

दूसरी ओर, ईरान ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। देश के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे “युद्ध का कदम” करार देते हुए कहा कि व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।

ईरान से जुड़े मीडिया शीर्ष नेताओं के जरिए यह चेतावनी भी दी जा रही है कि अगर नाकेबंदी जारी रही, तो देश “बलपूर्वक इसे तोड़ने” की कोशिश कर सकता है।

हिंद महासागर तक अमेरिकी कार्रवाई का विस्तार क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अहम है, क्योंकि इससे दक्षिण एशिया से जुड़े प्रमुख व्यापारिक और ऊर्जा मार्ग सीधे प्रभावित हो सकते हैं।

फिलहाल कूटनीतिक प्रयास ठप पड़े हैं। ईरान ने बातचीत में शामिल होने से इनकार करते हुए नाकेबंदी हटाने को पूर्व शर्त बना दिया है।

28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब तेल आपूर्ति और समुद्री मार्गों के नियंत्रण पर केंद्रित हो गया है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों पर, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है।