बेंगलुरु, 20 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक में कांग्रेस और भाजपा के बीच ‘वंदे मातरम’ के सिर्फ शुरुआती दो पद गाने के कांग्रेस वर्किंग कमिटी के फैसले को लेकर टकराव हो गया है। जहां कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है, वहीं भाजपा ने पार्टी पर देश की संस्कृति और राष्ट्रीय आंदोलन का अनादर करने का आरोप लगाया है।
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस कमेटी के फैसले का स्वागत किया और कहा कि कांग्रेस ‘वंदे मातरम’ के सिर्फ दो ही पैरा गाएगी। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा नेता खुद को देशभक्त मानते हैं तो उन्हें संघ की शाखाओं में राष्ट्रगान गाना चाहिए।
हरिप्रसाद ने कहा कि वे चाहे जो भी करें, हम ‘वंदे मातरम’ के सिर्फ दो ही पैरा गाएंगे। वे हमें जेल भेज दें या फांसी दे दें, हम तैयार हैं। हम भाजपा की तरह डरपोक नहीं हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि जब 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने ‘वंदे मातरम’ लिखा था तो उसमें मूल रूप से दो ही पद थे। उन्होंने कहा कि भाजपा इस गाने का राजनीतिकरण कर रही है और कांग्रेस के रुख में तुष्टीकरण का कोई सवाल ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर भाजपा नेता इतने ही देशभक्त हैं तो वे संघ की शाखाएं चलाएं और वहां राष्ट्रगान गाएं।
हरिप्रसाद ने भाजपा नेताओं द्वारा अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत की तारीफ करने पर भी तंज कसा। उन्होंने सवाल किया कि अगर संसद में कंगना के किसी गाने को राष्ट्रगान बताया जाए तो क्या वे उसे स्वीकार करेंगे।
कांग्रेस के रुख पर कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के उपनेता अरविंद बेलाड ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कमेटी का फैसला दिखाता है कि कांग्रेस और देशभक्ति के बीच कोई संबंध नहीं है।
बेलाड ने दावा किया कि कांग्रेस ने इस देश की संस्कृति का सम्मान नहीं किया है। कांग्रेस पार्टी और देशभक्ति के बीच कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान ‘वंदे मातरम’ युवाओं और स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है और कांग्रेस पर अपनी ही विरासत की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
बेलाड ने आरोप लगाया कि अगर सोनिया गांधी, कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस वर्किंग कमेटी पूरा वंदे मातरम गाने को तैयार नहीं हैं तो इससे पता चलता है कि उन्हें भारत और उसकी संस्कृति की कोई परवाह नहीं है।
उन्होंने आगे दावा किया कि राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मुद्दों के प्रति कांग्रेस का नजरिया उन वजहों में से एक है, जिनकी वजह से मतदाताओं ने अतीत में पार्टी को नकार दिया था।

