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उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर के दीक्षांत समारोह में छात्रों से राष्ट्रसेवा का किया आह्वान

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रायपुर, 2 सितंबर (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने स्नातक छात्रों से देश की सेवा समर्पण और ईमानदारी के साथ करने का आग्रह किया।

उपराष्ट्रपति ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का भी अवसर है। उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि उनकी डिग्री केवल शैक्षणिक सफलता का प्रतीक नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।

उन्होंने कहा, ”आज आप अपनी डिग्रियां प्राप्त कर रहे हैं और कल आपको भारत के लोगों के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन जैसी बहुमूल्य जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। आपको पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सेवा करनी है।”

उपराष्ट्रपति ने वर्ष 2012 में स्थापित एम्स रायपुर की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संस्थान ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि कम समय में ही एम्स रायपुर छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों के लिए एक प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य केंद्र बन गया है, जो ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक उन्नत चिकित्सा सेवाएं पहुंचा रहा है।

उन्होंने एम्स रायपुर को छत्तीसगढ़ के परिवर्तन का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह राज्य भय और अभाव के दौर से निकलकर शांति, प्रगति और नई संभावनाओं के युग में प्रवेश कर चुका है।

राज्य की पुरानी चुनौतियों का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां, कमजोर संपर्क व्यवस्था और वामपंथी उग्रवाद विकास में बड़ी बाधा थे। दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में सड़कें, स्कूल और अस्पतालों का अभाव था। लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास और समृद्धि के नए दौर की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा, ”दशकों पुराना नक्सली खतरा समाप्त हो चुका है और जो क्षेत्र कभी हिंसा के लिए जाने जाते थे, वे अब सड़क, स्कूल, अस्पताल, बेहतर संपर्क, निवेश और अवसरों के लिए पहचाने जा रहे हैं।”

उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर की चिकित्सा उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने राज्य के पहले किडनी प्रत्यारोपण, गुर्दा प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर तथा कॉर्निया और कान प्रत्यारोपण जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम को मिली मंजूरी उन्नत चिकित्सा सेवाओं की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि संतुलित विकास इसकी आधारशिला है। उच्च शिक्षा के विस्तार और छात्राओं की बढ़ती भागीदारी को उन्होंने प्रगति का महत्वपूर्ण संकेत बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद उच्च शिक्षा में महिला नामांकन में 42.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

दीक्षांत समारोह में कुल 689 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 376 छात्राएं और 313 छात्र शामिल थे।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों से नशे से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि वे तकनीक का उपयोग समावेशी विकास और समाज की बेहतरी के लिए करें।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा, ”आपका ज्ञान लोगों को स्वास्थ्य दे, आपका शोध नवाचार लेकर आए और आपकी सेवा दूसरों को प्रेरित करे।”

इसके बाद उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किए।