तिरुवनंतपुरम, 19 मई (आईएएनएस)। केरल विधानसभा चुनाव में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की करारी हार के बाद पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष पिनाराई विजयन ने सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीएम के भीतर असंतोष और बगावत की आवाजें लगातार तेज होती जा रही हैं।
मंगलवार को अपने गृह जिले कन्नूर में आयोजित एक पार्टी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विजयन ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में वाम सरकार ने केरल को आगे बढ़ाने के लिए कई कल्याणकारी और विकासात्मक योजनाएं लागू कीं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, कचरा प्रबंधन और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सरकार ने महत्वपूर्ण काम किए।
विजयन ने कहा, “हम जनता के फैसले को पूरी तरह स्वीकार करते हैं। हम यह नहीं कहते कि केवल हम ही ये काम कर सकते हैं। नई सरकार अगर जनकल्याण के लिए काम करेगी तो हम उसका समर्थन करेंगे, लेकिन अगर रास्ता गलत होगा तो हम विरोध भी करेंगे। किसी को भी इसे एलडीएफ या सीपीएम का अंत नहीं समझना चाहिए। हम मजबूती से वापसी करेंगे।”
4 मई को आए चुनाव परिणामों के बाद यह उनकी पहली सीधी सार्वजनिक प्रतिक्रिया मानी जा रही है। चुनाव में कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने 102 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया था।
तीसरी बार लगातार सत्ता में लौटकर इतिहास रचने का सपना देख रही एलडीएफ को महज 35 सीटों पर सिमटना पड़ा। वहीं, भाजपा ने भी तीन सीटें जीतकर विधानसभा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
चुनाव परिणाम आने के बाद से विजयन सार्वजनिक रूप से लगभग पूरी तरह गायब रहे थे। हार के कुछ दिनों बाद उन्होंने केवल एक संक्षिप्त सोशल मीडिया पोस्ट किया था। उनकी लंबी चुप्पी को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चाएं हो रही थीं और पार्टी के भीतर आलोचना भी बढ़ती जा रही थी।
विजयन के बयान को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इन दिनों पूरे केरल में सीपीएम की जिला समिति समीक्षा बैठकों में उनके खिलाफ अभूतपूर्व नाराजगी सामने आने की खबरें हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कई नेताओं ने विजयन की कार्यशैली को अहंकारी और आम कार्यकर्ताओं से कटे होने का आरोप लगाया है। कुछ नेताओं ने सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण और नेतृत्व के आम जनता व पार्टी कार्यकर्ताओं से दूर हो जाने को चुनावी हार का बड़ा कारण बताया।
बताया जा रहा है कि कुछ बैठकों में विजयन को नेता प्रतिपक्ष पद से हटाने की मांग भी उठी, जबकि राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन से भी हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की गई।
ऐसे माहौल में विजयन का “मजबूत वापसी” वाला बयान न केवल समर्थकों का मनोबल बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है, बल्कि इसे पार्टी के भीतर अपनी पकड़ और नेतृत्व कायम रखने के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

