इबोला संकट पर अमेरिका ने क‍िया मदद का वादा, डब्‍ल्‍यूएचओ पर लगाया देरी का आरोप

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वॉशिंगटन, 20 मई (आईएएनएस)। सेंट्रल अफ्रीका में तेजी से फैल रहे इबोला प्रकोप को रोकने के लिए बड़े स्तर पर मदद देने का वादा करते हुए ट्रंप प्रशासन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) की कड़ी आलोचना की।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि डब्‍ल्‍यूएचओ ने वैश्विक चेतावनी जारी करने में देरी की, जिससे जरूरी कार्रवाई शुरू करने में अहम समय निकल गया।

अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि वॉशिंगटन पहले ही लगभग 23 मिलियन डॉलर की मानवीय और स्वास्थ्य सहायता देने का वादा कर चुका है। इसके अलावा, प्रभावित इलाकों में करीब 50 इबोला उपचार केंद्र और क्लीनिक बनाने के लिए एक और बहुत बड़ा पैकेज तैयार किया जा रहा है।

एक अधिकारी ने कहा क‍ि अमेरिका अब बड़े स्तर पर आगे आने वाला है। उन्होंने बताया कि यह सहायता ‘सैकड़ों मिलियन डॉलर’ तक पहुंच सकती है, क्योंकि कई संगठन क्लीनिक बना रहे हैं और वहां मेडिकल स्टाफ भेज रहे हैं।

अधिकारियों के मुताबिक यह प्रकोप मुख्य रूप से कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) के एक दूरदराज और संघर्ष प्रभावित इलाके में फैला है। इससे मरीजों की पहचान करना, जरूरी सामान पहुंचाना और राहत टीमों को तैनात करना काफी मुश्किल हो रहा है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “हम इस मामले में देर से सक्रिय हुए क्योंकि डब्‍ल्‍यूएचओ भी थोड़ा देर से हरकत में आया। पांच मई को उन्हें वायरल हेमरेजिक फीवर की रिपोर्ट मिली थी, लेकिन यह पता लगाने और पुष्टि करने में कि यह इबोला का स्ट्रेन है, उन्हें दस दिन लग गए।”

अधिकारी ने कहा कि यह देरी बहुत नुकसानदायक साबित हुई क्योंकि कुछ दिनों की देरी भी बहुत बड़ा फर्क डाल सकती है।

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि डब्‍ल्‍यूएचओ ने 15 मई को सार्वजनिक रूप से इस प्रकोप की पुष्टि की। इसके बाद अमेरिका ने तुरंत आपातकालीन प्रतिक्रिया शुरू कर दी, जिसमें सीडीसी, स्टेट डिपार्टमेंट और कई मानवीय एजेंसियां शामिल हैं।

अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा कि उसने 24 घंटे काम करने वाली एक टास्क फोर्स सक्रिय कर दी है, जिसमें 2014 और 2018 के इबोला संकट में काम कर चुके अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा, डिजास्टर असिस्टेंस रिस्पॉन्स टीम (डीएआरटी) भी इलाके में भेजी गई है और कर्मचारी किंशासा व कंपाला पहुंच रहे हैं।

अधिकारियों ने पुष्टि की कि अमेरिकी निकासी अभियान से जुड़े लोगों में अब तक एक व्यक्ति इबोला पॉजिटिव पाया गया है जबकि कई अन्य लोगों की निगरानी की जा रही है।

एक अधिकारी ने कहा क‍ि अब तक हमारे पास एक पॉजिटिव मामला है। आठ लोगों को वहां से निकाला जा रहा है।

अमेरिका ने सख्त यात्रा प्रतिबंध भी लगाए हैं। सीडीसी के टाइटल 42 आदेश के तहत, जो विदेशी नागरिक पिछले 21 दिनों में डीआरसी, युगांडा या दक्षिण सूडान गए हैं, उन्हें अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि कांगो की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम शायद आगामी फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा ले सकेगी क्योंकि खिलाड़ी पहले से यूरोप में ट्रेनिंग कर रहे हैं और संभव है कि वे 21 दिन वाले प्रतिबंध के दायरे में न आएं।