तिरुवनंतपुरम, 8 जून (आईएएनएस)। केरल सरकार की महिलाओं को केएसआरटीसी बसों में मुफ्त यात्रा की महत्वाकांक्षी योजना 15 जून से लागू होगी। हालांकि शुरुआती चरण में यह सुविधा केवल साधारण (ऑर्डिनरी) बस सेवाओं में ही उपलब्ध होगी।
यह फैसला मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। निर्णय के पीछे केएसआरटीसी की वित्तीय स्थिति और परिचालन संबंधी चुनौतियों को कारण बताया गया है।
परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन ने कहा कि योजना की पूरी जानकारी मुख्यमंत्री सतीशन देंगे। पहले इस प्रस्ताव पर कैबिनेट में चर्चा होगी, जिसके बाद अंतिम घोषणा की जाएगी।
यूडीएफ सरकार ने अपने चुनावी वादों के तहत ‘इंदिरा गारंटी’ कार्यक्रम में इस योजना को शामिल किया था। इसे शुरुआती 100 दिनों के लिए परीक्षण के आधार पर लागू किया जाएगा।
इस दौरान यात्रियों की संख्या, राजस्व में होने वाले नुकसान और परिचालन पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद फास्ट पैसेंजर और लंबी दूरी की अन्य बस सेवाओं तक इस सुविधा का विस्तार करने पर फैसला लिया जाएगा।
परिवहन आयुक्त को परीक्षण अवधि के दौरान वित्तीय प्रभाव का विश्लेषण करते हुए रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार दूसरे चरण पर निर्णय इसी रिपोर्ट के आधार पर करेगी।
केएसआरटीसी के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 23 लाख यात्री उसकी सेवाओं का उपयोग करते हैं, जिनमें करीब 10 से 12 लाख महिलाएं हैं।
इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को मुफ्त यात्रा सुविधा देने से निगम पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ने की संभावना है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि इस नुकसान की पूरी भरपाई की जाएगी।
केएसआरटीसी के अनुमान के मुताबिक, केवल साधारण बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा देने से तीन महीने में करीब 57 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। यदि सिटी फास्ट सेवाओं को भी शामिल किया गया तो यह राशि बढ़कर 65 करोड़ रुपए हो सकती है।
वहीं साधारण, फास्ट पैसेंजर और सुपर फास्ट बसों तक योजना का विस्तार करने पर यह बोझ 90 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। सभी श्रेणी की बसों में मुफ्त यात्रा लागू करने पर तीन महीने में लगभग 112 करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है।
सरकार पहले से ही केएसआरटीसी के वेतन और पेंशन के लिए वित्तीय सहायता दे रही है। अब अतिरिक्त धन की व्यवस्था के लिए केरल फाइनेंशियल कॉरपोरेशन के माध्यम से विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
वित्त सचिव को ऐसी व्यवस्था तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, जिसके तहत योजना का खर्च पहले वहन किया जा सके और बाद में सरकार उसकी प्रतिपूर्ति कर सके।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना सभी महिलाओं के लिए होगी। इसके लिए जाति, आय या किसी अन्य आधार पर कोई पात्रता शर्त लागू नहीं की जाएगी।
योजना के दुरुपयोग को रोकने के लिए आधार से जुड़े स्मार्ट कार्ड जारी करने पर भी विचार किया जा रहा है।
हालांकि पहले चरण में केवल साधारण बसों को शामिल किए जाने से उत्तरी जिलों, खासकर मालाबार क्षेत्र की महिलाओं को लेकर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि वहां साधारण बसों की संख्या दक्षिणी जिलों की तुलना में कम है।
सरकार ऐसे क्षेत्रों में नई साधारण बस सेवाएं शुरू करने पर भी विचार कर रही है, जहां फिलहाल ये सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं।
केएसआरटीसी कर्मचारी संगठनों ने भी योजना के वित्तीय प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की है।
सीआईटीयू ने मांग की है कि अतिरिक्त वित्तीय बोझ पूरी तरह सरकार उठाए, जबकि बीएमएस ने केएसआरटीसी को सरकारी विभाग में बदलने की मांग की है।
हालांकि सरकार का कहना है कि टिकट से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई सब्सिडी के रूप में सीधे केएसआरटीसी को दी जाएगी और बजट में इसके लिए विशेष प्रावधान किया जाएगा, ताकि यह योजना निगम पर अतिरिक्त बोझ न बने।

