ताडेपल्ली (आंध्र प्रदेश), 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के पोन्नूर निर्वाचन क्षेत्र के समन्वयक अंबाती मुरली कृष्णा ने रविवार को आंध्र प्रदेश में टीडीपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार की आलोचना की। उन्होंने सरकार पर वाईएस जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में शुरू की गई आवास परियोजनाओं को पूरा न करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि सरकार को गरीबों को घर मुहैया कराने का श्रेय लेने से पहले इन घरों का निर्माण पूरा करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि जगन के कार्यकाल में सरकार ने 31.19 लाख परिवारों को आवास के लिए भूखंड आवंटित किए और 17,005 वाईएसआर जगनन्ना कॉलोनियां स्थापित कीं। मुरली कृष्णा ने कहा कि सरकार ने 22,80,358 घरों को मंजूरी दी और नौ लाख से अधिक घरों का निर्माण पूरा किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में एक भी नया घर नहीं बनाया है और लगभग 11 लाख घर निर्माण के विभिन्न चरणों में अधूरे छोड़ दिए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि टीडीपी ने मकानों के लिए जमीन के पट्टे बांटने से रोकने के लिए 1,000 से अधिक अदालती मामले दायर किए। उन्होंने कहा कि जगन ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया और पट्टे बांटने की अनुमति प्राप्त की।
उन्होंने आरोप लगाया कि अमरावती में सरकार ने 50,000 गरीब परिवारों के पट्टे को लेकर अदालत में मुकदमा किया और बाद में उन्हें रद्द कर दिया, जिससे उन परिवारों को रहने की जगह से वंचित कर दिया गया।
मुरली कृष्णा ने यह भी सवाल उठाया कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में हुई बैठक में राज्य में सूखे की स्थिति का मुद्दा क्यों नहीं उठाया गया। राज्य के 688 मंडलों में से 388 मंडल सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं। यहां तक कि इन मंडलों में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के निर्वाचन क्षेत्र कुप्पम के मंडल भी शामिल हैं। उन्होंने धान, कपास, मक्का, लाल चना, हरा चना और काला चना के न्यूनतम समर्थन मूल्यों पर जवाब मांगा।
मंत्री नादेंडला मनोहर द्वारा आवास संबंधी कथित अनियमितताओं की जांच की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए मुरली कृष्णा ने कहा कि वाईएसआरसीपी किसी भी जांच के लिए तैयार है। उन्होंने सरकार को काकीनाडा में चावल के मुद्दे की भी जांच करने की चुनौती दी।
उन्होंने कहा कि वाईएसआरसीपी स्थानीय निकाय चुनावों का विरोध नहीं कर रही है, बल्कि उसे सटीक मतदाता सूचियां चाहिए, जिनमें मृत मतदाताओं और फर्जी वोटों के बारे में स्पष्टता हो। उन्होंने कहा कि किसानों को उचित मूल्य प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है और कल्याणकारी योजनाओं के भुगतान में कमी आ रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्थाएं दबाव में हैं और सरकार के ध्यान की आवश्यकता है।
