भीषण गर्मी के बीच ‘सेंटीग्रेड स्केल’ का आविष्कार, आज ही के दिन बना था ‘सेल्सियस तापमान पैमाना’

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नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। देश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी और हीटवेव का प्रकोप जारी है। कई राज्यों में तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिसके कारण भारत सरकार लगातार एडवाइजरी जारी कर रही है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, आज नई दिल्ली का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।

इसी गर्मी भरे दिन एक दिलचस्प ऐतिहासिक संयोग भी जुड़ा हुआ है। आज ही के दिन यानी 19 मई 1743 को फ्रांसीसी वैज्ञानिक ज्यां पियरे क्रिस्टीन ने सेंटीग्रेड (सेल्सियस) तापमान पैमाने को विकसित किया था, जिसका हम आज भी इस्तेमाल करते हैं।

सबसे पहले स्वीडिश खगोलशास्त्री एंडर्स सेल्सियस ने वर्ष 1742 में इस स्केल को प्रस्तुत किया था। शुरुआत में उन्होंने पानी के उबलने का तापमान 0 डिग्री सेल्सियस और जमने का तापमान 100 डिग्री सेल्सियस निर्धारित किया था, लेकिन बाद में इस पैमाने को उलट दिया गया। मानक वायुमंडलीय दबाव पर शुद्ध बर्फ का गलनांक यानी फ्रीजिंग प्वाइंट 0 डिग्री सेल्सियस और शुद्ध पानी का क्वथनांक यानी बॉयलिंग प्वाइंट 100 डिग्री सेल्सियस माना जाता है।

‘सेंटीग्रेड’ शब्द का अर्थ है 100 भागों में विभाजित। पानी के जमने और उबलने के तापमान के बीच 100 डिग्री का अंतर होने के कारण यह नाम दिया गया। वर्ष 1948 में इसे आधिकारिक रूप से ‘सेल्सियस’ नाम दिया गया।

वैज्ञानिकों के अनुसार, सेल्सियस स्केल की सरलता और सटीकता ने इसे दुनिया भर में सबसे लोकप्रिय तापमान पैमाना बना दिया है। जब देश हीटवेव की चपेट में है, तब यह तापमान पैमाना और भी प्रासंगिक हो जाता है। मौसम विभाग, स्वास्थ्य मंत्रालय और आयुष मंत्रालय सभी सेल्सियस स्केल का इस्तेमाल करके लोगों को सतर्क करते हैं। यह स्केल न सिर्फ मौसम रिपोर्टिंग में, बल्कि विज्ञान, उद्योग, चिकित्सा, खाद्य सुरक्षा और इंजीनियरिंग के क्षेत्रों में भी व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

सेल्सियस स्केल के प्रमुख उपयोगों में मौसम पूर्वानुमान और हीटवेव चेतावनी, औद्योगिक प्रक्रियाओं का नियंत्रण, खाना पकाने और खाद्य सुरक्षा, वैज्ञानिक प्रयोग एवं अनुसंधान, साथ ही इंजीनियरिंग डिजाइन शामिल हैं।