नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। एडवोकेट एचएस फुल्का ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाने को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नाबालिग बच्चों के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा किए जा रहे कॉन्ट्रैक्ट भारतीय कानून के तहत सही नहीं हैं और इस मामले में स्पष्ट कानूनी व्यवस्था होनी चाहिए।
एचएस फुल्का ने कहा कि कोर्ट में इस मामले को लेकर नोटिस जारी किया गया था। भारतीय कानून के मुताबिक 18 साल से कम उम्र का बच्चा खुद किसी कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर नहीं कर सकता। ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा कम उम्र के बच्चों के साथ अकाउंट खोलने के लिए किए जा रहे समझौतों पर सवाल खड़ा होता है। ऐसे मामलों में बच्चे की ओर से उसके माता-पिता को कॉन्ट्रैक्ट करना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म छोटी उम्र के बच्चों के साथ सीधे कॉन्ट्रैक्ट कर रहे हैं, जो भारतीय कानून के अनुरूप नहीं है।
फुल्का ने बताया कि इस मामले में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। सरकार ने अदालत के सामने यह स्वीकार किया कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ किए जा रहे इस तरह के एग्रीमेंट को गंभीरता से देखने की जरूरत है। सरकार की ओर से अदालत को आश्वासन दिया गया है कि इस विषय पर जल्द कदम उठाया जाएगा। इसके लिए नया कानून लाने या नीति बनाकर मौजूदा कानून को लागू करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
फुल्का ने बताया कि सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि इस मामले में स्पष्ट वैधानिक ढांचा होना चाहिए, जिसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 18 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ सीधे कॉन्ट्रैक्ट करने से रोका जा सके। उन्होंने जस्टिस बागची की टिप्पणी का भी जिक्र किया। फुल्का ने बताया कि उन्होंने पहले यह मुद्दा उठाया था कि अमेरिका में 13 साल की उम्र के बच्चों के साथ एग्रीमेंट की व्यवस्था है और सोशल मीडिया कंपनियां उसी तरह की व्यवस्था भारत में भी अपना रही हैं।
फुल्का ने बताया कि सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने सरकार से कहा कि उसे अदालत के निर्देश का इंतजार नहीं करना चाहिए। सरकार को अपने स्तर पर इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस विषय पर जल्द से जल्द आवश्यक नीति या कानून तैयार करना चाहिए।
