नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली के एमएससी के छात्र ऋषिकेश कुमार की आत्महत्या की घटना के बाद छात्रों द्वारा व्यवस्था में बदलाव को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इसे लेकर आईआईटी-दिल्ली में बीटेक के दूसरे वर्ष के छात्र सक्षम ने सिस्टम में सुधार और छात्रों की सुरक्षा के लिए कड़े उपायों की मांग की है। उन्होंने बुधवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि ऋषिकेश पूर्वांचल कम्युनिटी का हिस्सा थे।
आईआईटी-दिल्ली में पूर्वांचल कम्युनिटी द्वारा सरस्वती पूजा आयोजित की जाती है, जिसमें मैं उनसे पहली बार मिला था। पूजा में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के साथ स्टेज होस्ट किया था। वह भी बिहार से ही आते थे और पूर्वांचल कम्युनिटी में हमारे एक साथी कार्यकर्ता थे।
पूजा में ही मेरी उनसे पहचान और बातचीत हुई थी। ऋषिकेश जी फिजिक्स विभाग से आते थे। इसलिए जब भी मुझे फिजिक्स के प्रोजेक्ट्स में कोई समस्या होती थी, मैं उनसे सहायता लेता था। हालांकि, हम दोनों के बीच काफी पर्सनल कनेक्शन नहीं था कि हम दोनों को एक-दूसरे के निजी जीवन के बारे में जान सकें। हम काम तक ही बात करते थे लेकिन उनकी सुसाइड की खबर मिलने के बाद छात्रों में आक्रोश काफी ज्यादा बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि हम मूल रूप से शिक्षा व्यवस्था के अंदर बदलाव लाना चाहते हैं। यहां बात केवल ऋषिकेश की नहीं है। उनके अलावा पिछले 30 महीनों में जिन सात लोगों ने आत्महत्या की और अब तक जिन छात्रों ने आईआईटी दिल्ली में आत्महत्या की है, हम उनके लिए यह प्रदर्शन कर रहे हैं।
यहां बात सिर्फ एक व्यक्ति विशेष की नहीं है बल्कि व्यवस्था की है। हम शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की बात कर रहे हैं ताकि इस प्रकार की आत्महत्या की घटनाओं पर रोक लगे। हम इस प्रकार की घटनाओं पर रोक के लिए एक समाधान की मांग कर रहे हैं। दिखावे के लिए किसी इस्तीफे का कोई लाभ नहीं है। इस्तीफे से इस बात की कोई गारंटी नहीं मिलती कि जो दूसरा आएगा, वह इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगा देगा।
सक्षम ने कहा कि क्या सरकार एक और छात्र की आत्महत्या का इंतजार कर रही है, जिसके बाद वह व्यवस्था में बदलाव लाएंगे? हम चाहते हैं कि आईआईटी दिल्ली में एक स्वतंत्र मेंटल हेल्थ केयर सेल बनाई जाए, जिसके लिए स्वतंत्र तरीके से सभी प्रकार की सुनवाई हो और उसका एडमिनिस्ट्रेशन से कोई लेनदेन न हो। वहीं, अगर किसी छात्र को लगे कि उसका कोई नहीं सुन रहा, तो मेंटल हेल्थ उसको सुने।
उन्होंने कहा कि आज तक आईआईटी दिल्ली में 160 सुसाइड हुए हैं। वहीं, पिछले 30 महीनों में इसमें 8 सुसाइड की घटनाएं हुई हैं। जो भी छात्र आईआईटी-दिल्ली में पढ़ने के लिए आते हैं, वे देश के टॉप ब्रेन होते हैं। ऐसे में समाज, परिजन और उनके परिवारवालों को उनसे काफी उम्मीद रहती है। इसी के साथ यहां पढ़ रहे छात्रों की खुद से भी काफी उम्मीदें होती हैं कि वे जीवन में अच्छा करेंगे, लेकिन एकेडमिक प्रेशर, इंटर्नशिप, प्लेसमेंट, प्रोजेक्ट्स और अन्य कई प्रकार के जो पर्सनल और प्रोफेशनल प्रेशर होते हैं, इन सबके साथ डील करते-करते जब एक व्यक्ति को असहाय महसूस होता है, तो उन्हें लगता है कि वह हर तरफ से बस फंसते जा रहे हैं। “न तो एडमिनिस्ट्रेशन मुझे सुन रहा। मेरे दोस्त मुझे समझ नहीं पा रहे। मेरा एकेडमिक खराब हो रहा। इंटर्नशिप नहीं लग रही।” इस प्रकार की अनेकों परेशानियां एक व्यक्ति को संशय और स्ट्रेस में डाल देती हैं। इस वजह से जब वह होपलेस महसूस करता है, तो उसके दिमाग में आत्महत्या जैसे ख्याल आते हैं।
उनके दिमाग में चलता है कि ऐसी जिंदगी जीने का क्या फायदा, जिसमें हम सिर्फ हारते ही चले जा रहे हैं। इन्हीं सभी सोच के कारण लोग इस प्रकार के कदम उठा लेते हैं। हालांकि, लोगों को यह समझना चाहिए कि जब तक हम जीवित हैं, जीवन में कुछ न कुछ कर सकते हैं। मिली हार या असंतुष्टता जीवन का अंत नहीं होता। उन्हें यह सोचना चाहिए कि अगर हम आईआईटी-दिल्ली तक आए हैं, तो जीवन में कुछ न कुछ अच्छा जरूर से कर लेंगे। आत्महत्या करना छात्रों के लिए बिल्कुल भी विकल्प नहीं है।
हालांकि, जिन लोगों ने ऐसा किया है, हम उनके लिए बिल्कुल खड़े हैं। हम उनके लिए सिस्टम के खिलाफ लड़ेंगे। हम छात्रों के द्वारा उठाए जा रहे इस कदम को लेकर समाधान चाहते हैं, न कि किसी का दिखावे के लिए रेजिग्नेशन। रेजिग्नेशन न्यूनतम है, इसके ऊपर तो बात भी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हम व्यवस्था में एक गहरी सफाई चाहते हैं। इसके बिना यह प्रदर्शन खत्म नहीं किया जाएगा।
