नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय फुटबॉल के इतिहास में आई. एम. विजयन का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। वह भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान भी रह चुके हैं।
आई. एम. विजयन का जन्म 25 अप्रैल 1969 को त्रिशूर, केरल में हुआ था। उनका पूरा नाम इनिवलाप्पिल मणि विजयन है। विजयन का बचपन काफी गरीबी में बीता। परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए उन्हें स्टेडियम में सोडा बेचने तक का काम करना पड़ा। लेकिन फुटबॉल के प्रति उनका जुनून उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा। उनकी प्रतिभा पर नजर पड़ी तत्कालीन डीजीपी एम. के. जोसेफ की, जिन्होंने उन्हें 17 साल की उम्र में केरल पुलिस फुटबॉल टीम में शामिल किया। यहीं से उनके पेशेवर करियर की शुरुआत हुई।
क्लब फुटबॉल में विजयन ने केरल पुलिस फुटबॉल क्लब, मोहन बागान, जेसीटी मिल्स फगवाड़ा, एफसी कोचीन और ईस्ट बंगाल जैसे प्रमुख क्लबों के लिए खेला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विजयन ने 1992 में भारतीय टीम के लिए पदार्पण किया और 72 मैचों में 29 गोल दागे। उन्होंने 2000 से 2004 तक भारतीय टीम की कप्तानी भी की। इस दौरान बाइचुंग भूटिया के साथ बनी उनकी जोड़ी को भारतीय फुटबॉल की सबसे बेहतरीन और आक्रामक जोड़ियों में गिना जाता है।
विजयन ने भारतीयफुटबॉल की दशा को सुधारने और टीम को ऊंचाई पर ले जाने के लिए कड़ी मेहनत की थी और परिणाम भी दिए थे। 1999 के सैफ कप में उन्होंने भूटान के खिलाफ मात्र 12 सेकंड में गोल कर इतिहास रच दिया, जो दुनिया के सबसे तेज अंतरराष्ट्रीय गोलों में शामिल है। 2003 के एफ्रो-एशियन गेम्स में विजयन ने चार गोल कर शीर्ष स्कोरर का खिताब हासिल किया। इसी वर्ष के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास ले लिया।
अपने करियर के दौरान भारतीय क्लब फुटबॉल के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे विजयन को ‘ब्लैकबक’ के नाम से भी जाना जाता था।
फुटबॉल के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2003 में अर्जुन पुरस्कार और 2025 में पद्मश्री से सम्मानित किया था।

