Sunday, July 5, 2026
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इंडोनेशिया: ‘गणेशा एक संस्कृति’ को पीएम मोदी का इंतजार, शेफ ने पिछली बार परोसे थे भारतीय पकवान

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जकार्ता, 5 जुलाई (आईएएनएस)। भारत और इंडोनेशिया के संबंध लगभग दो सहस्राब्दियों पुराने बताए जाते हैं, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चौथी इंडोनेशिया यात्रा भी इन्हीं गहरे रिश्तों की अहमियत को दर्शाती है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव इतना मजबूत रहा है कि भारत की कला, परंपरा और खान-पान ने इंडोनेशिया में भी अपनी खास जगह बना ली है।

इसी सांस्कृतिक सेतु का एक उदाहरण है फूड चेन ‘गणेशा एक संस्कृति,’ जो पिछले 33 वर्षों से इंडोनेशिया में भारतीय स्वाद और परंपरा को लोगों तक पहुंचा रही है। यह केवल एक रेस्तरां नहीं, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक बन चुका है।

इस फूड चेन की संस्थापक शिल्पा दवे और उनके स्टाफ को भी प्रधानमंत्री मोदी के इंडोनेशिया आगमन का बेसब्री से इंतजार है। उनका कहना है कि यह दौरा दोनों देशों के लोगों के बीच रिश्तों को और सुदृढ़ करने का एक और अवसर है।

आईएएनएस से बात करते हुए दवे ने बताया कि प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “हम बहुत उत्साहित हैं। मोदी जी पहले भी आ चुके हैं और जब वे बाली आए थे तो हमारे शेफ ने उनके लिए खाना बनाया था। हम पीएम मोदी से मिलने का इंतजार कर रहे हैं, और सभी उनके आने को लेकर काफी उत्साहित हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “भारत के पीएम ने देश दुनिया में हम हिंदुस्तानियों का नाम ऊंचा किया है। उनकी वजह से हम खुद को देश से जुड़ा पाते हैं।”

शिल्पा पिछले 33 वर्षों से इंडोनेशिया में रह रही हैं और भारतीय खानपान व संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही हैं। 12 जुलाई 2003 में इस रेस्तरां की नींव रखी गई थी।

गणेशा एक संस्कृति की खासियत पर बात करते हुए शिल्पा कहती हैं, “यहां के लोगों को असली भारतीय भोजन से परिचित कराने के उद्देश्य से मैंने ‘गणेशा एक संस्कृति’ चेन की शुरुआत की। आज इंडोनेशिया में ही नहीं, दक्षिण एशिया में भी हमारे कई आउटलेट हैं, जहां भारतीय व्यंजन परोसे जाते हैं और भारतीय संस्कृति को भी बढ़ावा दिया जाता है।”

इंडोनेशिया में भारतीय मूल के करीब 1,20,000 लोग और करीब 10 हजार पेशेवर रहते हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, व्यापारिक और रणनीतिक संबंध काफी गहरे और मजबूत हैं। भारत से होते हुए ही इंडोनेशिया में हिंदू, बौद्ध और बाद में इस्लाम धर्म पहुंचा। रामायण और महाभारत जैसी महाकाव्य यहां की लोक कला और नाटकों का अहम हिस्सा हैं। बाली द्वीप में हिंदू धर्म का गहरा प्रभाव आज भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

प्रधानमंत्री भी राजकीय यात्रा के दौरान योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रांबानन मंदिर परिसर का दौरा करेंगे, जो भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक संबंधों का प्रमुख प्रतीक माना जाता है।