Sunday, May 24, 2026
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ईरानी दूतावास ने अमेरिकी विदेश मंत्री की ‘बंधक’ टिप्पणी पर जताया सख्त ऐतराज

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नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी स्थित ईरानी दूतावास ने भारत यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की ‘बंधक’ टिप्पणी पर सख्त ऐतराज जताया है। एक प्रेस बयान जारी कर उनके दावे को सिरे से खारिज किया है।

बयान विभिन्न सोशल प्लेटफॉर्म्स पर भी साझा किया गया है, जिसके मुताबिक, “भारत स्थित इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान दूतावास, अमेरिकी विदेश मंत्री की टिप्पणियों को सिरे से खारिज करता है। देश यह स्पष्ट करता है कि ऐसे आरोप क्षेत्र की वास्तविकताओं को तोड़-मरोड़कर पेश करने तथा अमेरिका और इजरायली शासन की अस्थिरता फैलाने वाली नीतियों से ध्यान भटकाने का स्पष्ट प्रयास हैं।”

दरअसल, 23 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगट ने एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया, “विदेश मंत्री रूबियो और प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान को वैश्विक ऊर्जा ‘बाजार को बंधक’ बनाने की इजाजत नहीं देगा, और इस बात की पुष्टि की कि अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों में भारत की ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने की क्षमता है।”

ईरान ने अपने प्रेस नोट में आगे इसी पर अपनी बात स्पष्ट की। आगे लिखा कि विश्व के प्रमुख तेल और ऊर्जा निर्यातकों में से एक होने के नाते, ईरान हमेशा भारत सहित सभी देशों को अपने ऊर्जा संसाधन उपलब्ध कराने के लिए तैयार रहा है। हाल के वर्षों में वैश्विक ऊर्जा बाजार को जिस चीज ने बंधक बनाकर रखा है, वह ईरान के तेल निर्यात पर अमेरिका की ओर से लगाए गए ‘अवैध और अन्यायपूर्ण प्रतिबंध’ हैं। ये प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए केवल ईरानी जनता पर आर्थिक दबाव बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए हैं।

बयान में इस पाबंदी का ईरान के आम लोगों पर पड़ने वाले असर का जिक्र है। आगे कहा गया, “तेल प्रतिबंध, पिछले 47 वर्षों में अमेरिकी सरकार द्वारा ईरानी जनता पर लगाए गए व्यापक शत्रुतापूर्ण दबावों और कार्रवाइयों का केवल एक छोटा हिस्सा हैं। इन कदमों में दवाओं पर प्रतिबंध और ईरानी मरीजों की आवश्यक दवाओं और जीवनरक्षक चिकित्सा उपकरणों तक पहुंच सीमित करना भी शामिल रहा है, जिसके कारण दुर्भाग्यवश कई निर्दोष मरीजों की जान खतरे में पड़ी और व्यापक मानवीय पीड़ा उत्पन्न हुई।”

इस बयान में परमाणु कार्यक्रम को लेकर नीति भी स्पष्ट की गई है। कहा गया है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री के दावों के संबंध में, इस्लामी गणराज्य ईरान एक बार फिर याद दिलाता है कि परमाणु अप्रसार संधि का एक प्रतिबद्ध सदस्य होने के नाते उसने लगातार यह स्पष्ट किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में है। अब तक आईएईए ने ईरान की परमाणु गतिविधियों में किसी भी प्रकार का बदलाव न तो देखा है और न ही उसकी कोई रिपोर्ट दी है।

रूबियो भारत के 4 दिवसीय दौरे पर हैं। शनिवार (23 मई) को उन्होंने यात्रा की शुरुआत कोलकाता से की। इसके बाद वो दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों से लेकर वैश्विक मुद्दों पर गंभीर मंत्रणा हुई।