नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मामले की सुनवाई कर रहीं जज जस्टिस स्वर्ण कान्ता शर्मा ने खुद को इस केस से अलग करने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय साफ और स्पष्ट संदेश देता है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सीएम रेखा गुप्ता ने लिखा, “दिल्ली हाई कोर्ट का आज का फैसला जो आप नेता अरविंद केजरीवाल की उस याचिका पर आया है जिसमें उन्होंने संबंधित जज को केस से हटाने की मांग की थी, एक साफ और स्पष्ट संदेश देता है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।”
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल द्वारा न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाना और हाई कोर्ट के मौजूदा जज की निष्पक्षता पर संदेह करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की पवित्रता को भी गहरी चोट पहुंचाता है। जब ऊंचे सार्वजनिक पदों पर रह चुके लोग इस तरह का आचरण करते हैं, तो इससे न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा कम होने का खतरा पैदा हो जाता है।
उन्होंने कहा कि यह देखना भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ऐसा सिलसिला बार-बार देखने को मिलता है, जिसमें न्यायिक आदेशों को अपनी सुविधा के अनुसार तो मान लिया जाता है, लेकिन जब वे सुविधाजनक नहीं होते, तो उन पर सवाल उठाए जाते हैं। कानून के शासन द्वारा संचालित संवैधानिक लोकतंत्र में ऐसे दोहरे मापदंडों के लिए कोई जगह नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायालय ने बिल्कुल सही कहा है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे उसका पद या प्रभाव कुछ भी हो, न्यायिक प्रक्रिया से ऊपर नहीं है। न्याय को केवल धारणाओं के आधार पर नहीं गढ़ा जा सकता और न ही सत्य को बयानबाजी या सार्वजनिक चर्चाओं के जरिए बदला जा सकता है। लोग समझदार हैं और संस्थागत गरिमा के प्रति गहरी जिम्मेदारी की भावना के साथ इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। हम इस फैसले का पूरी तरह सम्मान करते हैं और न्यायपालिका में अपने अटूट विश्वास को दोहराते हैं।

