जम्मू-कश्मीर: उधमपुर में ऐतिहासिक बाउलियां स्थानीय आबादी के लिए बनीं जीवन रेखा

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उधमपुर, 20 मई (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में स्थित ऐतिहासिक बाउलियां आज भी हजारों लोगों के लिए जीवन रेखा बनी हुई हैं। पीढ़ियों से स्वच्छ पानी का स्रोत रही ये पारंपरिक जल संरचनाएं न केवल स्थानीय समुदाय की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कर रही हैं, बल्कि जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का भी संदेश दे रही हैं। स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता इन बाउलियों की साफ-सफाई और संरक्षण की अपील कर रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस अमूल्य जल स्रोत का लाभ उठा सकें।

जम्मू-कश्मीर: उधमपुर में ऐतिहासिक बाउलियां स्थानीय आबादी के लिए बनीं जीवन रेखा

एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने आईएएनएस को बताया कि उधमपुर जिले में जगह-जगह पर बाउलियां बनी हुई हैं। हमारी लोगों से यही अपील रहती है कि इन बाउलियों का हम सभी को संरक्षण करना चाहिए और यहां साफ सफाई रखनी चाहिए। इसके साथ ही हमें पानी को बचाना चाहिए। यह इसलिए भी जरूरी है कि हमारी आने वाली पीढ़ी इसी पर निर्भर होगी।

उन्होंने बताया कि लोग आसपास साफ-सफाई करते रहते हैं। इसके अलावा, एनजीओ से जुड़े लोग भी यहां आते हैं। हमारी लंबे समय से मांग रही है कि यहां निकलने वाले पानी को इकट्ठा करने के लिए व्यवस्थाएं की जानी चाहिए, क्योंकि बाउली से दिन-रात पानी बहता रहता है।

सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि यहां इलाके में बहुत पुरानी बाउली है। यहां दूर-दूर से लोग पानी भरने आते हैं। स्थानीय लोगों के लिए यही जीवन रेखा का सबसे अहम हिस्सा है।

एक स्थानीय युवक ने कहा कि सौभाग्यशाली हूं कि मैं ऐसे स्थान पर रहता हूं, जहां 70 प्रतिशत बाउलियां देखने को मिलती हैं। इनसे निकलने वाला पानी मौसम के अनुसार बदलता रहता है। सर्दियों के मौसम में पानी गर्म रहता है और गर्मियों में यह पानी ठंडा निकलता है।

उन्होंने बताया कि हमारे क्षेत्र की लगभग 70 प्रतिशत आबादी इसी पानी पर निर्भर रहती है। लोग नहाने से लेकर पीने के लिए इसी पानी का इस्तेमाल करते हैं। इसके कारण यहां लंबी लाइनें भी लगी होती हैं। युवक ने अनुरोध करते हुए कहा, “मेरा अपने युवा साथियों से अनुरोध है कि हमें ये पानी बचाना चाहिए। जैसे हमारे बुजुर्ग यहां साफ-सफाई रखते थे, उसी तरह हम यहां स्वच्छता को बनाए रखें, ताकि भविष्य में संकट आने पर इसका सही से इस्तेमाल किया जा सके।