नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। मैनुअल फ्रेडरिक भारतीय पुरुष हॉकी टीम के बेहतरीन खिलाड़ी थे। वह उस दौर में खेले जब भारतीय हॉकी का पूरे विश्व में दबदबा था। बतौर गोलकीपर खेलने वाले फ्रेडरिक 1972 में ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य रहे थे।
मैनुअल फ्रेडरिक का जन्म 20 अक्टूबर, 1947 को केरल के कन्नूर शहर में हुआ था। फ्रेडरिक का खेल में सफर तब शुरू हुआ जब उन्हें बेंगलुरु में आर्मी की स्कूल टीम में भर्ती किया गया। हॉकी से पहले वे कन्नूर में फुटबॉल खेलते थे।
उन्होंने 1971 में इंडिया के लिए डेब्यू किया और सात साल तक नेशनल टीम के लिए खेले। फ्रेडरिक ने दो हॉकी वर्ल्ड कप – नीदरलैंड्स (1973) और अर्जेंटीना (1978) में भी देश का प्रतिनिधित्व किया। नीदरलैंड में आयोजित हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ने सिल्वर मेडल जीता था। उनके करियर का सबसे अहम समय 1972 में म्यूनिख में आयोजित ओलंपिक था। भारतीय टीम ने इस ओलंपिक में ब्रांज मेडल जीता था।
फ्रेडरिक केरल राज्य से ओलंपिक मेडल जीतने वाले पहले खिलाड़ी थे। ओलंपिक मेडल जीतने वाले दूसरे केरलवासी पी. आर. श्रीजेश हैं, जिन्होंने 5 अगस्त 2021 को टोक्यो ओलंपिक्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। केरल के लिए दोनों मेडल नेशनल हॉकी टीम के गोलकीपरों ने जीते हैं।
फ्रेडरिक का क्लब करियर भी काफी सफल रहा था। उन्होंने कर्नाटक में एएससी और एचएएल के साथ-साथ सर्विसेज, उत्तर प्रदेश और मशहूर मोहन बागान क्लब का प्रतिनिधित्व किया। अपनी बेहतरीन और साहसिक गोलकीपिंग फ्रेडरिक अपने दोस्तों और टीम के साथी खिलाड़ियों के बीच ‘टाइगर’ के नाम से मशहूर थे। उन्होंने पेनल्टी स्ट्रोक को बचाने में महारत हासिल की थी।
भारतीय खेलों में फ्रेडरिक के शानदार योगदान को देखते हुए उन्हें 2019 में मेजर ध्यानचंद अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। 31 अक्टूबर 2025 को 78 वर्ष की आयु में उनका निधन बेंगलुरु में हुआ था।
