Friday, August 7, 2026
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झारखंड में 14 दिन से सड़कों पर छात्र, अब जाकर राहुल गांधी ने जताई चिंता : नीरज कुमार

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पटना, 7 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड में जेपीएससी पेपर लीक के खिलाफ चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन को कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा समर्थन दिए जाने पर जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने सवाल उठाए।

उन्होंने कहा, “मैं बार-बार यह सवाल पूछ रहा था कि राहुल गांधी चुप क्यों हैं? झारखंड के इस मुद्दे पर तेजस्वी यादव चुप क्यों हैं? अगर छात्र वहां विरोध कर रहे हैं, तो वे उनसे बात क्यों नहीं कर रहे हैं? जब यह मुद्दा चर्चा में आया, तब राहुल गांधी ने चिंता जताई। ऐसे मुद्दों पर हमेशा चिंता करनी चाहिए और लगातार सोचना चाहिए। तभी स्थिति बेहतर होगी।”

14 दिन से छात्र सड़कों पर हैं लेकिन सरकार की तरफ से अब तक कोई बातचीत नहीं हुई है। इसको लेकर नीरज कुमार ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में संवाद को सबसे बड़ी पूंजी माना गया है। देश का संविधान ही नहीं, महात्मा बुद्ध और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी संवाद को ही जीवन का केंद्र बिंदु मानते थे। छात्र की समस्या हो या सरकारी कर्मी की समस्या हो या किसानों की समस्या हो, न आंदोलन करने वाला हठधर्मी होना चाहिए, न सरकार को हठधर्मी होना चाहिए। दोनों पक्ष को लचीला होकर देश की आर्थिक और सामाजिक परिस्थिति के आधार पर नीतियों को तय करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। ऐसे में सरकार को तुरंत छात्रों से बात करके सुदृढ़ परीक्षा प्रणाली बनानी चाहिए।”

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए नीरज कुमार ने कहा कि आरक्षण अपने आप में जरूरी है, लेकिन इसका मूल्यांकन भी होना चाहिए। उन्होंने कहा, “आरक्षण एक ऐसा मुद्दा है जिसने आजादी के दशकों बाद भी सभी सामाजिक समस्याओं का समाधान नहीं किया है। हालांकि, इससे जुड़ी सामाजिक संवेदनाओं के कारण यह एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है। सबसे पहले यह आकलन किया जाना चाहिए कि दलितों और ओबीसी के लिए आरक्षण का लाभ वास्तव में उन लोगों तक कितना पहुंचा है जिनके लिए इसे बनाया गया था।”

उन्होंने आगे कहा, “सरकारी पद रहेगा, तब ना आरक्षण की बात होगी। जिस ढंग से नई आर्थिक नीति आने के बाद पदों के खुलने की प्रक्रिया बदली है, आरक्षण की मांग अब सरकारी क्षेत्र के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों में भी उठने लगी है। लेकिन डॉक्टर अंबेडकर ने जिस भावना के साथ आरक्षण दिया था वह पूरी नहीं हुई, उसका गुनहगार कौन है? इस संबंध में पूरी सम्यक नीति बनाने की जरूरत है।”

महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए नीरज कुमार ने कहा, “महिलाओं के आरक्षण की मांग पुरानी है। यह मामला देश की संसद में लगातार उठता रहा, विधानमंडल में उठता रहा। नीतीश कुमार ने पंचायती राज में महिलाओं को हिस्सेदारी देकर हमने देश के सामने मॉडल स्थापित किया, उसके बाद देश के दूसरे राज्यों ने किया।”

उन्होंने कहा कि अब महिला आरक्षण को संसद और विधानसभाओं में लागू करने के लिए परिसीमन जरूरी है। यह संवैधानिक आवश्यकता है। जनगणना के बाद ही परिसीमन होना चाहिए। जनगणना में अभी बहुत लंबा समय है। जब सामाजिक-आर्थिक जनगणना हो जाए, तो परिसीमन होना चाहिए। लोकतंत्र में अगर वोट का अधिकार मिला है, तो उसकी सीमाएं भी तय होनी चाहिए। इस सवाल पर कोई राजनीतिक मतभेद, ईर्ष्या के तहत है तो वह दुखद है।”

नीरज कुमार ने विदेशी फंडिंग के मुद्दे को देश की राजनीति के लिए बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा, “विदेशी फंडिंग में अनियमितता की शिकायत लगातार मिलती रही है। एनजीओ के नाम पर विदेशी फंडिंग का राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है। अब तो हालात यह हो चुके हैं कि राजनीतिक दल चैरिटी ट्रस्ट से चल रहा है।”

उन्होंने कहा कि कोई भी विदेशी फंडिंग देश का भला करने के लिए नहीं दी जाती। चुनाव आयोग और सरकार को मिलकर ऐसी फंडिंग पर नजर रखनी चाहिए।

डिजिटल पेमेंट यूपीआई पर लेनदेन शुल्क लगने की अटकलों पर नीरज कुमार ने कहा कि अगर शुल्क लगता है तो इसमें बुराई नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर आप यूपीआई के जरिए ट्रांजैक्शन करना चाहते हैं, तो इसके लिए शुल्क देने में क्या बुराई है? अगर आपने बिजनेस के लिए जीएसटी नंबर लिया है और ट्रांजैक्शन करना चाहते हैं, तो आपको उस सिस्टम के लिए भुगतान करना होगा।”