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झारखंड में लंबे से ड्यूटी से गैरहाजिर 631 डॉक्टरों को सेवामुक्त करने की प्रक्रिया शुरू

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रांची, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। झारखंड में नियुक्ति के बाद कार्यस्थल पर योगदान नहीं देने या लंबे समय से अनुपस्थित रहने वाले 631 डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। विभाग ने अलग-अलग वर्षों में नियुक्त इन चिकित्सकों को चिह्नित किया है। मामलों की समीक्षा के बाद नियमानुसार उनकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, चिह्नित किए गए डॉक्टरों में वर्ष 1988 में नियुक्त एक, 1990 में 16, 1997 में दो, 2000 में सात, 2009 में 308, 2012 में 65, 2013 में 38, 2015 में 124, 2020 में 37, 2021 में 17 और 2023 में नियुक्त 16 डॉक्टर शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग इससे पहले भी इस तरह के मामलों में कार्रवाई कर चुका है।

वर्ष 2025 में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के माध्यम से नियुक्त 86 मेडिकल ऑफिसर और 57 विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त की गई थीं। इन डॉक्टरों ने नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण नहीं किया था। विभाग की इस पहल का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

लंबे समय से खाली पड़े पदों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए विभाग रिक्तियों की स्थिति की समीक्षा कर रहा है। इन पदों पर जरूरत के अनुसार नए डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए झारखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में डॉक्टरों की भूमिका महत्वपूर्ण है और सरकार की प्राथमिकता राज्य के प्रत्येक सरकारी अस्पताल तथा स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति के बाद कार्यस्थल पर योगदान नहीं देना या बिना उचित कारण लंबे समय तक अनुपस्थित रहना गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और रिक्त पदों पर नए डॉक्टरों की नियुक्ति की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।