Sunday, June 7, 2026
SGSU Advertisement
Home राजनीति झारखंड विधानसभा में राज्य सरकार ने केंद्र पर लगाए आरोप, विपक्ष ने...

झारखंड विधानसभा में राज्य सरकार ने केंद्र पर लगाए आरोप, विपक्ष ने भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाए

0
29

रांची, 27 फरवरी (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन शुक्रवार को ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य और पंचायती राज विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। चर्चा का जवाब देते हुए ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता गांवों के समग्र विकास पर है। गांवों की तकदीर और तस्वीर बदलना ही विभाग का लक्ष्य है।

मंत्री ने इसी वर्ष राज्य में लागू हुए पेसा कानून को आदिवासियों के लिए “सुरक्षा कवच” बताते हुए कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ग्रामसभा को सशक्त बनाना जरूरी है। ग्रामसभा को गांव का वास्तविक मालिक बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं और उसकी बैठकें सार्वजनिक भवन, बंद स्कूल या धुमकुड़िया भवन में भी आयोजित की जा सकेंगी। सहायक सचिव के पदों पर महिलाओं को प्राथमिकता देने की भी घोषणा की गई।

मनरेगा (अब बीवी-जी रामजी) के संदर्भ में मंत्री ने कहा कि इस वर्ष 12 करोड़ मानव दिवस के लक्ष्य के विरुद्ध 10 करोड़ मानव दिवस का सृजन किया गया है और रोजगार की गारंटी समाप्त नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने केंद्र पर बकाया राशि रोके जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मनरेगा की हजारों करोड़ रुपये की राशि लंबित है और 15वें वित्त आयोग का पैसा भी रोका गया है। अबुआ आवास योजना के तहत 1.90 लाख आवास पूर्ण होने की जानकारी देते हुए उन्होंने विभिन्न किस्तों के भुगतान का ब्योरा दिया और कहा कि योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं है।

मंत्री ने स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि 2.72 करोड़ पौधे महिला समूहों द्वारा लगाए गए हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहे हैं। विपक्ष की ओर से भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बजट खर्च की गति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि पिछले वित्तीय वर्ष में ग्रामीण विकास विभाग को 9,500 करोड़ रुपये मिले, लेकिन जनवरी 2026 तक केवल 367 करोड़ रुपये ही खर्च हुए। ग्रामीण कार्य विभाग और पंचायती राज विभाग में भी बजट उपयोग कम रहने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि जब पूर्व आवंटन ही खर्च नहीं हो पा रहा है तो नए बजट का औचित्य क्या है। प्रदीप प्रसाद ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ अधिकारियों के यहां छापेमारी में बड़ी मात्रा में नकदी और महंगी वस्तुएं मिली हैं। जेलकेएम के विधायक जयराम महतो ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के मासिक खर्च में अंतर का हवाला देते हुए गांव-शहर की खाई पाटने की जरूरत बताई और सड़क-पुल निर्माण में जन फीडबैक तथा पारदर्शिता बढ़ाने के सुझाव दिए।

अमित यादव ने बीवी-जी रामजी और जीआरएमजी योजना के कार्यान्वयन पर सवाल उठाते हुए लंबित आवास योजनाओं को पूरा करने की मांग की। कांग्रेस के सुरेश बैठा और सीपीआई एमएल के चंद्रदेव महतो ने भी पेसा कानून में सुधार, ग्रामसभा को मजबूत करने और लंबित योजनाओं को समय पर पूरा करने पर जोर दिया। चर्चा के दौरान जहां सरकार ने ग्रामीण विकास को प्राथमिकता बताते हुए अपनी उपलब्धियां गिनाईं, वहीं विपक्ष ने बजट उपयोग, पारदर्शिता और कार्यान्वयन को लेकर सरकार को घेरा।