मुंबई, 28 सितंबर (आईएएनएस)। 14 फीट से ऊंची झुग्गियों को गिराने के मुद्दे पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की मेयर रितु तावड़े ने प्रशासन के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अगर किसी कार्रवाई से लोगों को परेशानी हो रही है और उनके घर टूटने की स्थिति पैदा हो रही है, तो इस पर जनप्रतिनिधियों से चर्चा होनी चाहिए थी। मेयर ने स्पष्ट कहा कि वह लोगों के घरों को गिराए जाने के पक्ष में नहीं हैं।
मेयर रितु तावड़े ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि यह मुद्दा अब बीएमसी सदन में चर्चा के लिए उठाया जाएगा। उन्होंने बताया कि उनके ग्रुप लीडर और मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम भी इस मामले का विरोध कर चुके हैं। उनके मुताबिक, ग्रुप लीडर इस मुद्दे पर सदन में प्रस्ताव लाएंगे और सभी पार्षदों को उस पर अपनी बात रखने का मौका मिलेगा।
मेयर ने कहा कि प्रशासन अगर अच्छा काम करता है तो जनप्रतिनिधि उसका स्वागत करते हैं, लेकिन अगर किसी फैसले से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है या उनके घरों पर कार्रवाई की जा रही है, तो उसके तरीके पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि घर कानूनी हैं या गैर-कानूनी, यह एक अलग पहलू है, लेकिन इस तरह की कार्रवाई से पहले जनप्रतिनिधियों से चर्चा की जानी चाहिए थी।
रितु तावड़े ने कहा कि बीएमसी का निर्वाचित सदन अब काम कर रहा है और प्रशासन को भी इस बात को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब साढ़े चार साल का प्रशासनिक कार्यकाल नहीं है, बल्कि 227 पार्षद चुनकर आ चुके हैं।
उन्होंने कहा, “कॉरपोरेशन सबसे बड़ा निर्णय लेने वाला निकाय है। प्रशासन को कॉरपोरेशन द्वारा लिए गए फैसलों के अनुसार काम करना होगा।”
मेयर ने कहा कि प्रशासन द्वारा लिए जाने वाले महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी मेयर, डिप्टी मेयर और सदन के नेताओं को दी जानी चाहिए, ताकि वे जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।
महायुति गठबंधन का हिस्सा होने का उल्लेख करते हुए रितु तावड़े ने कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के साथ गठबंधन के तहत बीएमसी में हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य लोगों के घरों को बचाना है, न कि उन्हें गिराना।
उन्होंने कहा, “अगर प्रशासन को कोई फैसला लेना है, तो मेयर, डिप्टी मेयर और सदन के नेता को इसकी जानकारी देना बहुत महत्वपूर्ण है। जब हम लोगों के बीच जाते हैं, तो हम उनके प्रति जवाबदेह होते हैं। अगर हमसे सलाह लिए बिना कोई फैसला लिया जाता है, तो यह चिंता का विषय है।”
