Thursday, July 30, 2026
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जेएनयू में छात्र निष्कासन और भारी जुर्मानों के खिलाफ अभाविप का कड़ा रुख, सीपीओ मैनुअल को निरस्त करने की मांग

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नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर दमनकारी नीति थोपने और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है और इसके खिलाफ अपना कड़ा रुख अपनाया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कहा कि प्रशासन छात्र आंदोलन को कुचलने के लिए निष्कासन और भारी-भरकम जुर्मानों का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में कर रहा है, जो पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की तरफ से कहा गया है कि हमारे सक्रिय कार्यकर्ताओं को निष्कासित कर उनके शैक्षणिक भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की प्रशासन की यह कोशिश सफल नहीं होगी। हम प्रशासन के इस निष्कासन राज और जुर्माना आदेशों का पुरजोर विरोध करते हैं और चेतावनी देते हैं कि राष्ट्रवादी छात्र ऐसी कायराना कार्यवाहियों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। तानाशाही के विरोध स्वरूप कार्यकर्ताओं ने दमनकारी आदेशों की प्रतियां जलाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

विद्यार्थी परिषद की तरफ से कहा गया है कि ‘सीपीओ मैनुअल’ को लेकर अभाविप का स्टैंड पहले दिन से स्पष्ट और अडिग रहा है। यह तानाशाही मैनुअल विश्वविद्यालय के स्वतंत्र वातावरण के लिए घातक है और इसे तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए। अभाविप जेएनयू पहले भी इस दमनकारी नियमावली के विरुद्ध अपना कड़ा विरोध दर्ज करा चुकी है। प्रशासन अपनी अक्षमता को छिपाने के लिए ऐसे काले कानूनों का सहारा लेना बंद करे।

उनका कहना है कि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जेएनयू के शैक्षणिक माहौल को प्रदूषित कर दिया गया है। अभाविप जेएनयू विरोध के नाम पर की जाने वाली किसी भी प्रकार की ‘तोड़-फोड़’ और अराजकता के सख्त खिलाफ है। सार्वजनिक संपत्ति विश्वविद्यालय की धरोहर है और उसे नुकसान पहुंचाना किसी भी रूप में न्यायसंगत नहीं है। हम वामपंथी संगठनों द्वारा की जाने वाली ‘तोड़-फोड़ की राजनीति’ की कड़ी निंदा करते हैं।

अभाविप जेएनयू अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि हमारा मुख्य विरोध प्रशासन के उस तानाशाही ढांचे से है जो छात्रों को निष्कासित कर उनके अधिकारों का हनन कर रहा है। लगभग 4,83,000 का जुर्माना और निष्कासन के आदेश यह दर्शाते हैं कि प्रशासन पूरी तरह विफल हो चुका है। अभाविप सीपीओ मैनुअल को पूरी तरह खत्म करने और अभाविप के निष्कासित कार्यकर्ताओं को बहाल करने की मांग पर डटी हुई है।

अभाविप जेएनयू मंत्री प्रवीण कुमार पीयूष ने कहा कि न तो प्रशासन की गुंडागर्दी सहेंगे और न ही परिसर में किसी भी प्रकार की तोड़-फोड़ का समर्थन करेंगे। प्रशासन यह जान ले कि विद्यार्थियों को डराने की उसकी रणनीति अब और नहीं चलेगी। हमारा विरोध उन आदेशों के खिलाफ है। हमने अभाविप के कार्यकर्ताओं के निष्कासन और अवैध जुर्मानों के आदेशों को जलाकर यह संदेश दे दिया है कि हम इस व्यवस्था को नहीं मानते। अभाविप जेएनयू सामान्य छात्रों के लिए काम करती है और प्रशासन की इस तानाशाही के विरुद्ध अंतिम विजय तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।