जेपीएससी की झारखंड पात्रता परीक्षा में प्रश्न पत्रों की कमी से हंगामा, दो विषयों की परीक्षा रद्द

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रांची/बोकारो, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। झारखंड लोक सेवा आयोग की ओर से रविवार को आयोजित झारखंड व्याख्याता पात्रता परीक्षा (झारखंड एलिजिब्लिटी टेस्ट) भारी कुप्रबंधन और अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई। रांची और बोकारो के एक-एक परीक्षा केंद्र पर प्रश्नपत्रों की भारी कमी और तकनीकी खामियों के कारण अभ्यर्थियों ने जोरदार हंगामा किया।

इसके बाद आयोग ने उड़िया विषय (कोड-023) और शिक्षा विषय (कोड-009) की परीक्षा रद्द कर दी है। दोनों विषयों की परीक्षा अब दोबारा कराई जाएगी, जिसकी नई तिथि, समय और केंद्र से संबंधित जानकारी जल्द ही आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी।

बोकारो के सेक्टर-9 स्थित सरदार पटेल पब्लिक स्कूल स्थित परीक्षा केंद्र पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अभ्यर्थियों को पता चला कि शिक्षा विषय (कोड-009) के प्रश्नपत्रों के एक सेट की 32 प्रतियां पहुंची ही नहीं हैं। दोपहर करीब 12:30 बजे प्रशासन ने स्वीकार किया कि संबंधित विषय के प्रश्नपत्र गलती से धनबाद भेज दिए गए हैं।

इस सूचना के बाद देवघर, दुमका और गोड्डा जैसे दूर-दराज के जिलों से आए 729 अभ्यर्थी आक्रोशित हो गए और केंद्र के बाहर नारेबाजी शुरू कर दी। न तो परीक्षार्थियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति हो सकी और न ही उन्हें पेपर दिया गया।

हंगामे को देखते हुए बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा और पुलिस अधीक्षक स्वयं मौके पर पहुंचे। उनके साथ सिटी डीएसपी, यातायात डीएसपी और कई थानों की पुलिस को तैनात करना पड़ा।

इसी तरह रांची के जिला स्कूल स्थित केंद्र पर उड़िया विषय के जो प्रश्न पत्र वितरित किए गए, वह अपठनीय थे। यहां भी परीक्षार्थियों ने हंगामा किया। रांची के सांसद और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इस घटना को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है।

उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और घोर लापरवाही है। परीक्षा रद्द करना समाधान नहीं है, बल्कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। जेपीएससी में बैठे लोग शायद युवाओं की मेहनत और उनके संघर्ष की अहमियत नहीं समझते। सिर्फ एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दोषियों को छोड़ा नहीं जाना चाहिए।”

झारखंड में 18 साल के लंबे अंतराल के बाद यह परीक्षा आयोजित की जा रही थी। कई छात्र झारखंड के बाहर के राज्यों से तत्काल टिकट लेकर पहुंचे थे। अभ्यर्थियों ने सिस्टम की पारदर्शिता और तैयारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।